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अकाल तख्त ने बनाया सिख सेंसर बोर्ड

– सिख धर्म पर फिल्म रिलीज से पहले लेनी होगी मंजूरी
अमृतसर। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सिख धर्म से संबंधित फिल्मों के मामले में सख्ती दिखाते हुए फिल्म सेंसर बोर्ड की तर्ज पर 21 सदस्यीय सिख सेंसर बोर्ड का गठन कर दिया है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को हिदायत दी है कि भविष्य में सिख धर्म से संबंधित फिल्म बनाने या दृश्यों को रिलीज करने से पहले निर्माता-निर्देशक श्री अकाल तख्त से लिखित मंजूरी हासिल करें। सिख धर्म पर कोई टीवी सीरियल बनाने पर भी यह मंजूरी लेनी होगी। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक राजकुमार संतोष इन दिनों बैटल ऑफ सेरागढ़ी निर्माण कर रहे हैं। इसकी शूटिंग श्रीगंगानगर में चल रही है।
जत्थेदार ने बताया कि बोर्ड फिल्मों में सिख इतिहास, सिख विरासत, गुरु मर्यादा से संबंधित दृश्यों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त को भेजेगा। अकाल तख्त से मंजूरी के बाद ही फिल्म का निर्माण हो सकेगा। निर्माण के बाद रिलीज से पहले भी मंजूरी हासिल करनी होगी। दृश्यों व अन्य सामग्री की जांच के लिए गठित सेंसर बोर्ड का कोआर्डिनेटर एसजीपीसी के उपसचिव (धर्म प्रचार कमेटी) सिमरजीत सिंह को बनाया गया है।
तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह तथा श्री दरबार साहिब के ग्रंथी मान सिंह को भी सिख सेंसर बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया गया है। अन्य सदस्यों में एसजीपीसी सदस्य भगवंत सिंह सियालका, हरदीप सिंह मोहाली, बीबी किरणजोत कौर, सचिव धर्म प्रचार कमेटी, डीएसजीपीसी के चेयरमैन (धर्म प्रचार) परमजीत सिंह, दमदमी टकसाल से ज्ञानी परङ्क्षमदर सिंह, ज्ञानी जसबीर सिंह रोडे आदि को शामिल किया गया है।
हाल ही में धार्मिक फिल्म नानक शाह फकीर की रिलीज को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। अकाल तख्त ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाते हुए इसके निर्माता हरजिंदर सिंह सिक्का को पंथ से निष्कासित कर दिया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था, लेकिन सिख धर्म के रोष को देखते हुए पंजाब सहित कुछ और राज्यों में फिल्म रिलीज नहीं हुई थी।