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अपने सांसदों ने ही कराई सरकार की फजीहत

नई दिल्ली। विपक्ष पर अब तक संसद नहीं चलने का दोष मढ़ती आ रही सरकार शुक्रवार को राज्यसभा में कोरम तक नहीं जुटा पाने को लेकर खुद ही घिरती नजर आई। राज्यसभा में कोरम की घंटी दो-दो बार बजने के बाद भी सदन चलाने के लिए सदन में न्यूतनम जरूरी 25 सांसदों को भी सरकार जुटाने में नाकाम रही। इस तरह हंगामे की भेंट चढ़ती रही राज्यसभा शुक्रवार को कोरम के अभाव में स्थगित हो गई। नोटबंदी पर संग्राम को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर बारह बजे ही स्थगित हो गई। शुक्रवार ढाई बजे से सांसदों के निजी बिल पर चर्चा का समय होता है। इसलिए निश्चित समय पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या के न्यूनतम 10 फीसद यानि 25 सदस्य भी सदन में नहीं थे। उपसभापति ने तब कोरम की घंटी बजवाई फिर भी इतने सांसद नहीं जुट पाए। तो नियमानुसार कोरम की दूसरी घंटी बजती रही और फिर भी कोरम पूरा नहीं हुआ। तो उपसभापति पीजे कुरियन ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए कोरम के अभाव में स्थगित कर दी। कोरम का सवाल कांग्र्रेस के नेता आनंद शर्मा ने उठाया। उस वक्त सदन में कांग्र्रेस के तीन नेता गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल बोरा और आनंद शर्मा ही मौजूद थे। जब कोरम जुटाने की बात शुरू हुई और घंटी बजाई गई तो उस बीच कांग्र्रेस के नेता भी सदन से बाहर चले गए। राज्यसभा में कोरम की यह हालत तब रही जब भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर रखा है। कोरम की घंटी बजने के बाद भी सदन में कुल 21 सदस्य थे इसमें भी मंत्री के नाते बैठे रामविलास पासवान, अर्जुन मेघवाल और पीपी चौधरी सभी लोकसभा के सदस्य थे।