अब बनेगा श्रीगंगानगर शहर का जोनल प्लान

– इसमें होगा संस्थानिक क्षेत्र, स्कूलों, जलस्रोतों, वन भूमि, डे्रनेज, सीवरेज, पेयजल पाइपलाइन, सुविधा क्षेत्र का डिमार्केशन
श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय सहित जिले के सभी शहरों और कस्बों के मास्टर प्लान के बाद अब जोनल प्लान भी बनाए जाएंगे। इसके तहत शहर को कई भागों में बांट कर अलग-अलग व्यवस्थाएं की जाएंगी। जोनल प्लान में संस्थानिक क्षेत्र, स्कूलों, जलस्रोतों, वन भूमि, डे्रनेज, सीवरेज, पेयजल पाइपलाइन, सुविधा क्षेत्र का डिमार्केशन होगा।
नगर विकास एवं आवासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कल जयपुर में विभिन्न नगर निकायों के जन प्रतिनिधियों के साथ बैठक मेें विस्तार से चर्चा कर इस बारे में निर्णय किया। इसी के साथ नगरीय विकास और आवासन विभाग ने जोनल प्लान बनाने के लिए सभी निकायों को परिपत्र के जरिए गाइडलाइन जारी कर दी है। जोनल प्लान बनाने के लिए 240 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है।
जयपुर में हुई इस बैठक में श्रीगंगानगर नगर विकास न्यास के अध्यक्ष संजय महिपाल ने शिरकत की। उन्होंने बताया कि राज्य हाई कोर्ट ने गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार मामले में जोनल प्लान बनाने के लिए कहा है। उसकी पालना में तमाम व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
परिपत्र में कहा गया है कि यह जोनल प्लान भूखंडों या जोन की स्वतंत्र प्लानिंग के लिए जरूरी होंगे। किसी जोन को स्पेशल रीजन मानकर उसकी प्लानिंग के लिए जोनल प्लान जरूरी किए गए हैं। प्रत्येक स्थानीय निकाय के जोनल प्लान में प्रत्येक प्रोपर्टी का डिटेल बेस मैप और मौजूदा लैंड यूज का उल्लेख करना होगा।
परिपत्र के अनुसार जोनल प्लान को मास्टर प्लान और ले-आउट प्लान के बीच लिंक के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसमें संस्थानों, स्कूलों, जलस्रोतों, वन भूमि, डे्रनेज, सीवरेज, पेयजल पाइपलाइन, सुविधा क्षेत्र का डिमार्केशन होगा।
यूआईटी अध्यक्ष संजय महिपाल ने बताया कि जोनल प्लान बनाने के लिए मैं व्यक्तिगत तौर पर प्रयासरत्त हूं। जोनल प्लान बनने से शहर को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। जाने प्लान बनने के बाद कृषि भूमियों का नियमन संभव हो पाएगा।