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अ स्कैंडल- एवरीवन हैज वन

aयह फिल्म दुनियावी ख्वाहिशों की उद्दाम लालसा की छवियां प्रस्तुत करता है। साथ ही अपने स्वार्थ और गलतियों के लिए किसी भी हद तक जाने के अंजाम को भी। शुद्धतावादियों को ईशान त्रिवेदी की स्पतष्टता और खुलेपन से दिक्कत हो सकती है, लेकिन यहां चरित्रों के संबंध व दृश्य संचरना में सौंदर्य की छटाएं दिखती हैं। देह दर्शन के बावजूद अश्लीलता के भाव नहीं हैं। यह मूल रूप से कौटुम्बिक व्यभिचार, युवा वर्ग की अपने सपने के पीछे अंधी दौड़ और एक अनसुलझी हत्याकांड की गुत्थी का सम्मिश्रण है। लेखक-निर्देशक का प्रयास प्रयोगवादी हॉरर गढऩे का था। उसे एडिटिंग का समुचित साथ नहीं मिल पाया है।
कहानी नैनीताल में केंद्रित है। कोया व विभु अपने दोस्तों प्रबल व अस्मि के साथ अपने मौसा मानव के यहां आती है। मानव की नौ साल की बेटी कुहू झील में डूब कर मर जाती है। मानव उस गम को भुला नहीं पाता। उसे मरी हुई कुहू दिखने लगती है। साथ ही उसके आचार-व्यवहार में भी हैरतअंगेज परिवर्तन आ जाते हैं। विभु को मूलत: उस बदलाव व मानव की त्रासदी पर फिल्म बनाना है, पर वह उसकी तह में जाना चाहता है तो कोया मना कर देती है। विभु फिर भी मामले की तफ्तीश करने लगता है। आखिर में जब सभी राज से पर्दा उठता है तो कोया के अतीत से कौटुम्बिक व्यभिचार और कई चीजों का पता चलता है।
कहानी का प्लॉट प्रभावी है, मगर वह सीन से अनावश्यक मोह के चलते चुस्त और रोमांचक बनने से रह गई है। दृश्य लंबे हो गए हैं, उससे फिल्म की गति में व्यवधान पड़ता है। विभु व कोया एक-दूसरे को प्यार करते हैं, मगर परस्पर विरोधी स्वभाव के हैं। वहां अचानक कोया के प्रति प्रबल का एकतरफा प्यार परवान चढऩे लगता है। उससे कहानी एक अलग दिशा में भटक जाती है। दिलचस्पी का केंद्र कोया के मौसा मानव की मनोदशा है। इंसान से शैतान बनने के क्रम में चेहरे पर बदलते भावों को उन्होंने बखूबी निभाया है। विभु की भूमिका में जॉनी बी बावेजा प्रॉमिसिंग लगे हैं। कोया के अवतार में रीथ मजुमदार की शिद्दत दिखती है। बाकी कलाकारों का काम औसत है। बापी-टुटुल का बैकग्राउंड स्कोर उम्दा है। गानों को खूबसूरती से पेश किया गया है।