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आक्रोशित किसानों ने जयपुर बाइपास घेरा

– जाम से रफ्तार थमी, पुलिस का भारी जमावड़ा
जयपुर। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेशव्यापी विधानसभा घेराव के आह्वान पर आज विभिन्न जिलों से जयपुर पहुंचे हजारों किसानों को पहले तो पुलिस ने सीपीआईएम कार्यालय से बाहर ही नहीं निकलने दिया, लेकिन किसानों ने जबरदस्ती आगे की ओर कूच किया। बाद में पुलिस ने जयपुर बाइपास पर ही रोक लिया। यहां किसानों ने जाम लगाकर राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। श्रीगंगानगर से गये किसान नेता विजय रेवाड़ व सीकर, हनुमानगढ़ और जयपुर से पहुंचे माकपा नेताओं ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
सीपीआईएम कार्यालय के बाहर आयोजित सभा को कईं नेताओं ने सम्बोधित किया। इससे पहले रात्रि को कईं किसान नेताओं को पुलिस ने जबरदस्ती गिरफ्तार कर लिया और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। फिर भी विभिन्न तहसीलों, गांवों से अपने वाहनों से काफी संख्या मेें किसान जयपुर पहुंच गये हैं। किसानों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। जयपुर बाइपास पर जाम लगने से वाहनों की लम्बी कतारें लग गई हैं। इस कारण जहां लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं पुलिस ने यातायात को डायवर्ट किया है।
किसान सड़क पर ही पड़ाव डालकर बैठे हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया तो वे यही पड़ाव पर डटे रहेंगे। जब तक उनकी मांगे हीं मानी जायेंगी, तब तक हिलने वाले नहीं हैं। इस आंदोलन में भाग लेने के लिए अन्य जिलों से बसों से भी काफी संख्या में किसान पहुंचे। नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर किसानों में भारी रोष देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, राष्ट्रीय कौंसिल सदस्य श्योपतराम मेघवाल, किसान सभा के जिलाध्यक्ष कालू थेारी, भूमि विकास बैंक रायसिंहनगर के पूर्व अध्यक्ष राकेश ठोलिया, गंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर आदि से कईं नेताओं को पुलिस पूर्व में ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये
जयपुर में विधानसभा के बाहर पुलिस के कड़े सुरक्षा बंदोबस्त हैं। वहीं जयपुर बाइपास पर भी भारी तादाद में पुलिस बल तैनात किया गया है।
पुलिस ने अब तक पूरे राज्य में साठ से सत्तर किसान नेताओं को गिरफ्तार किया है और अभी भी गिरफ्तारी लगातार की जा रही है। पिछले दो दिनों से किसान नेताओं की गिरफ्तारियां होने से शेष बचे किसान नेता जैसे-तैसे करके जयपुर में पहुंच गये हैं।
यह हैं मांगें
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, सम्पूर्ण कर्जमाफी, फिरेाजपुर फीडर का निर्माण, किसान नेताओं को रिहा करने आदि प्रमुख मांगे रखी गई हैं।