आखा तीज पर शनिदेव ने बदल ली चाल

– वक्री हुए शनि सीधे तौर पर करेंगे लोगों की प्रकृति को प्रभावित
श्रीगंगानगर। धनु राशि में मौजूद शनिदेव ने बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर प्रात: 7 बजकर 16 मिनट से उल्टी चाल चलना यानी वक्री होना शुरू कर दिया। शनिदेव 6 सितंबर को सायं 4 बजकर 40 मिनट तक धनु राशि में वक्री रहेंगे। शनि के वक्री होने का विभिन्न राशि के जातकों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। कुछ राशियों के जातक खासे फायदे मेें रहेंंगे तो कुछ राशि वालों को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।
पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि कोई भी ग्रह जब अपनी सामान्य दिशा की बजाय उल्टी दिशा यानी विपरीत दिशा में चलना शुरू कर देता है तो ऐसे ग्रह की इस गति को वक्र गति कहा जाता है। वक्र गति से चलने वाले ऐसे ग्रह विशेष को वक्री ग्रह कहा जाता है। आज से शनिदेव ऐसी ही चाल में आ गए हैं।
उन्होंने बताया कि शनि अब तक अपनी सामान्य गति से धनु राशि में भ्रमण कर मकर राशि की तरफ जा रहे थे किन्तु वक्री होने की स्थिति में शनि ने उल्टी दिशा में चलना शुरू कर दिया है। छह सितंबर तक वे उल्टी दिशा में ही चलेंगे और फिर मार्गी होकर मकर राशि में जाएंगे।
यह होता है असर
पंडित पाराशर ने बताया कि शनि जब वक्री होते हैं तो सीधे तौर पर व्यक्ति की प्रकृति को प्रभावित करते हैं। इस दौरान लोग असुरक्षित, अंतर्विरोधी, असंतोषी, अशांत अनुभव करते हैं। ऐसे में उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है तथा अपने शक्की स्वभाव के कारण अपने प्रियजनों को ही शत्रु बना बैठते हैं। यह शनि के वक्री होने का ही असर होता है, जिससे व्यक्ति आत्मकेंद्रित होकर स्वार्थी बन जाते हैं।
छह राशि के जातकों को मिलेंगी सौगातें
शनि के मित्र ग्रहों की राशियों मिथुन-कन्या, वृषभ-तुला और स्वयं की राशि मकर-कुंभ के लिए शनि का वक्री होना कई तरह की सौगातें लेकर आ सकता है जबकि शत्रु ग्रहों की राशियों सिंह, कर्क, मेष-वृश्चिक के लिए शनि का वक्री होना परेशानियां बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। शनि के सम ग्रह बृहस्पति के आधिपत्य में आने वाली दो राशियों धनु और मीन के जातकों के लिए वक्री शनि का मिलाजुला असर होगा।