एकेटीयू के निलंबित कुलसचिव तोमर को राज्यपाल ने किया बर्खास्त, भ्रष्टाचार के थे आरोप

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के निलंबित चल रहे कुलसचिव यूएस तोमर को राज्यपाल व कुलाधिपति राम नाईक ने बुधवार को बर्खास्त कर दिया। तोमर पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए राज्यपाल की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उन्हें दोषी पाया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल ने तोमर को बर्खास्त करने का फैसला किया। यूएस तोमर पर आरोप था कि एकेटीयू के कुलसचिव रहते हुए उन्होंने जानबूझ कर 44 कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ संबद्धता प्रदान की। उन पर सत्र 2013-14 में विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को प्रवेश देने के समय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में नियमों के विपरीत संबद्धता आदेश जारी करने का आरोप था। शासन के पत्र में उल्लिखित रिट याचिकाओं में कुलसचिव रहते हुए पैरवी न करना और जानबूझ कर सुप्रीम कोर्ट में प्रतिशपथ पत्र न दाखिल करने के आरोप भी उन पर थे। सत्र 2014-15 में कुलसचिव के रूप में तोमर द्वारा अपने स्तर से अनधिकृत रूप से बैंक खाता खोलकर और विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाइट से इतर कोई अन्य वेबसाइट शुरू करते हुए संस्थाओं से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने तथा अपनाई गई प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अधिनियम/विनियमों का अनुपालन न करने के आरोप भी थे। उन पर भ्रष्टाचार व अनुशासनहीनता के भी आरोप थे। राज्यपाल ने तोमर पर लगे आरोपों की जांच के लिए 5 नवंबर 2015 को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसके त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था। इसमें डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति प्रो. गुरदीप सिंह और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सर्वेश चंद्र मिश्रा को सदस्य नामित किया गया था।