कर्नाटक में हिंदुत्व को जोडऩे की अलख जगाएंगे योगी आदित्यनाथ

कर्नाटक। कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने सूबे में प्रभावी लिंगायत समुदाय को जहां हिंदू धर्म से अलग करने का खेल खेला है, वहीं भारतीय जनता पार्टी उत्तरप्रदेश के भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की धुआंधार चुनावी रैलियां करवाकर सभी हिंदू पंथों के एक होने का संदेश देना चाहती है। कर्नाटक में योगी के प्रचार अभियान के पहले ही चरण में 12 रैलियों की योजना बनाई गई है। जबकि भाजपा सूत्रों के अनुसार प्रचार अभियान की समाप्ति तक कर्नाटक में योगी की लगभग 34 रैलियां एवं रोड शो होंगे। गुरुवार से शुरू हो रहे उनके पहले चरण के प्रचार अभियान की सभी रैलियां मलेनाडु, पश्चिमी घाट एवं कारवार क्षेत्रों में रखी गई हैं। इन सभी क्षेत्रों में विभिन्न मठों-मंदिरों की बहुतायत है। इनमें लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा एवं ब्राह्मण सभी समुदायों के मठ हैं। इन मठों में आस्था रखनेवाले लाखों लोग हैं। आमतौर पर बड़े सुव्यवस्थित तरीके से चलनेवाले इन मठों के जरिये अध्यात्म का तो प्रचार-प्रसार होता ही है। इनके जरिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी जनोपयोगी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। राजनीतिक विश्लेषक वेणुगोपलन कहते हैं कि जिस प्रकार हिंदुओं के एक अंग नाथ संप्रदाय के महंत योगी आदित्यनाथ भगवा धारण करते हैं, उसी प्रकार लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा आदि संप्रदायों के मठाधीश भी भगवा ही धारण करते हैं। ये सभी वर्ग भगवद्गीता, उपनिषद एवं वेदों का भी अध्ययन करते हैं। भले ही इनकी पूजा पद्धतियां भिन्न-भिन्न हों। योगी की सभाओं से इन्हीं विभिन्नताओं में एकता का संदेश देने की योजना बनाई गई है। सिद्धारमैया सरकार मंदिरों की तर्ज पर ही मठों के भी अधिग्रहण का कानून बनाना चाहती थी। मठों के तीव्र विरोध के कारण यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक के सामने नहीं आ सका था। माना जा रहा है कि योगी अपनी सभाओं में इस मुद्दे को भी छूने का प्रयास करेंगे।