कर्मचारी की सेवा समाप्ति से पहले प्रक्रिया की पालना जरूरी

– गैर अनुदानित संस्थाओं के मामले में हाई कोर्ट ने दी व्यवस्था
श्रीगंगानगर। राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक मामले मेंं व्यवस्था दी है कि गैर अनुदानित संस्था के कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के लिए राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम की धारा 18 की पालना आवश्यक है। भले ही उस कर्मचारी ने चाहे एक दिन के लिए या दैनिक मजदूरी या निश्चित अवधि के लिए ही नियुक्त हो।
खंडपीठ के न्यायाधीश केएस झवेरी और विजय कुमार व्यास ने प्रबंध समिति आर्य महिला विद्यापीठ कॉलेज टीचर्स एजुकेशन भुसावर भरतपुर की विशेष अपील याचिकाएं खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है।
प्रार्थी शिवराम व समुद्र सिंह ने राजस्थान गैर सरकारी शैक्षिक संस्था अधिकरण के समक्ष अपील पेश कर बताया था कि उनकी नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुई थी लेकिन बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। अधिकरण ने प्रार्थी गणों के पक्ष में फैसला देकर उनकी सेवा में बहाली के आदेश दिए। संस्था ने एकलपीठ के समक्ष अधिकरण के फैसले को चुनौती दी। जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया। इसके बाद संस्था ने विशेष याचिकाएं पेश कर कहा कि संस्था गैर अनुदानित है एवं कर्मचारियों ने मात्र पांच माह काम किया है।
प्रार्थी गणों के अधिवक्ता डीपी शर्मा का तर्क था कि सेवा समाप्ति से पूर्व कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की पालना आवश्यक है। चाहे संस्था गैर अनुदानित क्यों न हो।