कश्मीरी सेब की बम्पर आवक सस्ता है खूब खाइए

– श्रीगंगानगर में रोजाना पहुंच रहा पांच सौ क्विंटल सेब
श्रीगंगानगर। मौसम बदलना शुरू हो गया है। खाने-पीने के दिन गा गए हैं। ऐसे में कश्मीरी सेब की बम्पर आवक हो रही है। कश्मीर से रोजाना पांच-सौ क्विंटल सेब श्रीगंगानगर पहुंच रहा है। खूब सस्ता भी है। आप चाहें तो खूब सेब खाकर सेहत बना सकते हैं। शहर मेें सेब तीस रुपए से सत्तर-अस्सी रुपए किलो बिक रहा है। इसमें 80 प्रतिशत सेब सस्ता ही है। सत्तर-अस्सी रुपए वाले सेब की बिक्री बहुत कम हो रही है।
फल विक्रेताओं के अनुसार दो महीने तक हिमाचल प्रदेश का सेब चला। अब हिमाचली सेब की आवक बंद हो गई है। इन दिनों कश्मीर से डिलीशियस सेब आ रहा है। इनमें से काफी आवक ऐसे सेब की हो रही है, जो वृक्ष के कांटे लगने या बर्फबारी के दौरान आंशिक तौर पर खराब है। ऐसे सेब को ‘मक्खी वाला सेबÓ कहा जाता है। मक्खी वाले सेब की क्वालिटी और महंगे सेब की क्वालिटी एक समान है। दोनों ही डिलिशियस सेब हैं लेकिन कट लगे होने अथवा हल्का दबा होने के कारण मक्खी वाले सेब के दाम सबसे कम हैं। थोक फल विक्रेता सुरेन्द्र सचदेवा ने बताया कि मक्खी वाला सेब यहां मंडी में बारह, पन्द्रह और बीस रुपए थोक भाव में बिक रहा है, जिसे खुदरा दुकानदार तीस से चालीस रुपए प्रतिकिलो बेच रहे हैं।
साफ-सुथरा सेब मंडी में पच्चीस, तीस और पैंतीस रुपए किलो थोक भाव में बिक रहा है, जिसे खुदरा दुकानदार पैंतालिस से पचास हजार प्रतिकिलो बेच रहे हैं। इसके बाद सबसे बढिय़ा सेब की श्रेणी में आने वाला सेब है, जिसके थोक भाव पैंतालिस से पचास रुपए प्रतिकिलो हैं और यह सेब बड़ी दुकानदारों और अच्छे काउंटर्स पर सत्तर से अस्सी रुपए प्रतिकिलो के दामों मेें बेचा जा रहा है। इस सेब की आवक मात्रा बीस फीसदी है। सचदेवा ने बताया कि कश्मीरी सेब की बम्पर आवक का कारण वहां तापमान का बढऩा है। अभी भी कश्मीर में तीस डिग्री सेल्सियस तक तापमान बना है। तापमान बढऩे से सेब अपने आप ही गिर रहा है। जिसे सहेज कर रख पाना संभव नही है। सचदेवा ने बताया कि कश्मीरी सेब की बम्पर आवक अभी डेढ़-दो महीने तक जारी रहेगी।