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कश्मीर से आएगा तभी मिलेगा सस्ते सेब का स्वाद

– कफ्र्यू के कारण श्रीगंगानगर नहीं पहुंच पा रहा कश्मीरी सेब
– शहर में सौ रुपए किलो बिक रहा हिमाचल का सेब
श्रीगंगानगर। आतंकी बुरहान की मौत के बाद कश्मीर में लगातार हिंसा और कफ्र्यू के कारण कश्मीर का विश्व प्रसिद्ध सेब श्रीगंगानगर तक नहीं पहुंच रहा है। जब तक कश्मीरी सेब यहां नहीं आएगा, तब तक लोगों को सस्ता सेब उपलब्ध नहीं होगा। अभी यहां हिमाचल प्रदेश का सेब पहुंंच रहा है, जो कश्मीरी सेब के मुकाबले फीका है और महंगा भी बिक रहा है। वर्तमान में शहर के बाजार मेंं बढिय़ा सेब का खुदरा मूल्य सौ रुपए है। कश्मीरी सेब की आवक शुरू होने पर बढिय़ा सेब पचास-साठ रुपए किलो मेंं मिलने लगेगा।
स्थानीय फल व्यापारियों के अनुसार कश्मीर में सेब की सात किस्में पैदा होती हैं। इनमें एक किस्म अगस्त में ही तैयार हो जाती है, जबकि शेष किस्में दो महीने में तैयार हो जाएंगी। इस साल खराब मौसम के कारण कश्मीर की पैदावार कम हुई है। ऊपर से लगातार हिंसा और कफ्र्यू की वजह से सेब उत्पादक अपना सेब कश्मीर से बाहर नहीं भेज पा रहे।
कश्मीर के बारामूला, शोपियां, सोपोर, पुलवामा, कुपवाड़ा में मुख्य रूप से सेब की पैदावार होती है। इनमें अंबरी सेब की किस्म अक्टूबर में, डिलेशियस सितंबर-नवम्बर, अमेरिकन सितंबर-अक्टूबर, महाराजी अक्टूबर-नवम्बर, राजकबारी सितंबर और हजरतबली किस्म जुलाई-अगस्त में तैयार हो जाती है।
डेढ़ महीने से जारी हिंसा की वजह से श्रीगंगानगर के लोगों को अभी तक  हिमाचल का सेब खाना पड़ रहा है। जो एक तो फीका और दूसरा महंगा है। हिमाचली सेब थोक में 60-70 रुपये किलो और खुदरा में सौ रुपए प्रति किलो बिक रहा है।
थोक फल व्यापारी बाबू खां रिजवी ने बताया कि यदि कश्मीर का सेब यहां पहुंचना शुरू हो जाए तो हिमाचली सेब के भाव भी गिर जाएंगे। फिर लोगों को 50 से 60 रुपये किलो तक सेब उपलब्ध होना शुरू हो जाएगा। रिजवी ने बताया कि अभी श्रीगंगानगर में हिमाचल प्रदेश के शिमला और कुल्लू से 20-25 टन सेब की आवक हो रही है।