कांग्रेस को उप्र में नए अध्यक्ष की तलाश

लखनऊ। लोकसभा उप चुनावों के नतीजों से मायूस कांग्रेस ने उप्र में नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज करते हुए संगठनात्मक बदलाव का मन बना लिया है। मिशन-2019 के मद्देनजर सामाजिक समीकरण साधने को पिछड़े वर्ग या ब्राह्माण चेहरे पर दांव लगाने की तैयारी है। प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का ओहदा बढ़ाने के साथ उन्हें स्टार प्रचारक के तौर पर अन्य राज्यों में भी लगाया जाएगा। दिल्ली अधिवेशन के बाद कांग्रेस के संगठन और कार्य प्रणाली में फेरबदल की कवायद शुरू हो गई है। बुजुर्ग नेताओं के बदले युवाओं को बढ़ावा दिए जाने के साथ सामूहिक उत्तरदायित्व के आधार पर संगठन चलाने की तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक ब्राह्माण व मुस्लिमों की वापसी पर ध्यान देगी और अन्य पिछड़े वर्ग पर भी नजर रहेगी। गत विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने ब्राह्माण चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति तैयार की थी, लेकिन समाजवादी पार्टी से गठबंधन के बाद चुनावी एक्शन प्लान पूरा नहीं हो सका था। बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद के लिए शीला दीक्षित को उम्मीदवार के तौर पर प्रचारित किया था। चुनाव में भले ही ब्राह्माण कार्ड का लाभ नहीं मिल पाया हो परंतु पार्टी में बड़ा खेमा कांग्रेस की वापसी के लिए ब्राह्माण व मुस्लिमों को जोडऩा जरूरी मानता है। पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्र का कहना है कि आमजनता यह मानती है कि कांग्रेस को मजबूत किए बगैर देश और प्रदेश में भाजपा को कमजोर नहीं किया जा सकता है। इसके लिए पार्टी के पुराने वोटबैंक की वापसी जरूरी है।