किसान और लोमड़ी से समझें जीवन को जीने का सलीका

प्रेरक कथा – एक किसान एक बार जंगल में लकडिय़ां बटोरने के लिए गया। वहां उसे ऐसी लोमड़ी नजऱ आई जिसके दो पैर नहीं थे। बावजूद वह संतुष्टिपूर्वक चल रही थी।
किसान ने सोचा कि आखिर यह कैसे जीवन जी पाती होगी क्योंकि बिना पैर के शिकार भी नहीं कर पाती होगी। थोड़ी देर बाद उसे एक शेर दिखाई दिया जो कि शिकार करके आ रहा था।
यह देख जानवर घबराकर दौडऩे लगे। किसान भी भयभीत हो गया। वह जान बचाने के लिए एक वृक्ष पर चढ़ गया। तभी उसे आश्चर्य हुआ। उसने देखा कि शेर ने अपने शिकार का कुछ हिस्सा लोमड़ी के लिए डाला और चला गया।
यह सदभावना देखकर वह दंग रह गया। उसने मन की मन परमात्मा को धन्यवाद दिया यह सोचकर कि चलो हर प्राणी के लिए परमात्मा आजीविका का प्रबंध कर ही देता है। कुछ समय बाद किसान वहां से चला गया। वह एक सुनसान जगह गया और खाने की प्रतीक्षा करने लगा।
महीनों बीतने के बाद भी उसके पास कोई नहीं आया। उसे भूखों मरने की नौबत आ गई। तभी उसे एक संत मिले। संत ने उसके लिए भोजन एवं पानी उपलब्ध कराया।
किसान ने आहार ग्रहण किया और लोमड़ी वाला किस्सा बताया। संत ने सुनकर स्पष्ट किया कि इसमें तुम्हारी समझने की भूल थी।
तुम मददगार भी बन सकते थे लेकिन तुमने लाचार बनना पसंद किया, जबकि तुम लाचार नहीं थे। बाद में जब तुम वास्तव में लाचार हो गए, तो तुम्हारे पास मदद पहुंच गई।
कहानी का सार यही है कि हमारे जीवन में कई बार ऐसे हालात बन जाते हैं कि हम लाचार बन जाते हैं लेकिन हमें भगवान पर और खुद पर भरोसा रखना चाहिये।