BREAKING NEWS
Search

किसी के साले तो किसी के बहनोई ने डाला टेण्डर

– 13 करोड़ के लिए 30 फर्मों ने लिया निविदा में भाग
श्रीगंगानगर (एसबीटी)। नगर परिषद क्षेत्र के 50 वार्डों में 13 करोड़ रुपये से करवाये जाने वाले 90 कार्यों की निविदाएं बुधवार को खोली गई। 30 ठेकेदार फर्मों ने अलग-अलग कार्यों के लिए करीब 290 निविदा पत्र डाल रखे हैं।
लेखाधिकारी रमेश बिहाणी, सहायक अभियंता मंगत सेतिया, कनिष्ठ अभियंता वेदप्रकाश सहारण की कमेटी ने टैण्डर खोलने की कार्यवाही की। इस दौरान कुछ पार्षद व ठेकेदार भी मौजूद रहे। जैसे-जैसे टैण्डर के लिफाफे खोले गए, ठेकेदारों की उत्सुकता बढ़ती गई। नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त मिलखराज चुघ ने टैण्डर खोले जाने के दौरान वीडियोग्राफी का दावा किया है, जबकि मौके पर लेखा शाखा में किसी तरह की वीडियोग्राफी नहीं करवाई गई। पूर्व पार्षदों, वर्तमान पार्षदों, उनके रिश्तेदारों की फर्मों के द्वारा भी टैण्डर में शामिल होने की जानकारी मिली है। एक पार्षद के साले की फर्म तो एक की बहनोई की फर्म से निविदाएं डलवाई गई हैं। नगर परिषद के अधिकारियों ने बताया कि नगोसिएशन के बाद कम लागत पर काम करने वाले ठेकेदारों को कार्य आदेश में प्राथमिकता दी जाएगी। टैण्डर खुलने के साथ ही कुछ ठेकेदार व पार्षद इन्हें निरस्त करवाने के प्रयासों में जुट गए हैं। इनमें शामिल ठेकेदारों को मनमाफिक काम व पार्षदों को चहेते ठेकेदारों को काम मिलता नजर नहीं आ रहा।
यह काम मिलीभगत से दिए
टैण्डर खोले जाने के दौरान मिलीभगती और ठेकेदारों के पुल के आरोप वाली पर्चियां भी लिफार्फों से निकली हैं। पार्षद हरविन्द्र पाण्डे व कनिष्ठ अभियंता वेदप्रकाश ठेकेदारों फर्मों की निविदा के लिफाफे खोल रहे थे। इस दौरान एक लिफाफे से टैण्डर कॉपी के साथ ‘यह काम मिलीभगती से दिए गए हैंÓ तथा एक अन्य लिफाफे से ‘ठेकेदारों ने कर रखा है पुलÓ लिखी पर्चियां भी निकली। परिषद के अधिकारियों ने लिफाफों से पर्ची को पार्षदों की शरारत बताया, तो वहीं हरविन्द्र पाण्डे व संदीप शर्मा ने टैण्डर के साथ दोनों पर्चियां निकलने का दावा किया है।
पर्दे के पीछे बड़े ठेकेदार व पार्षद
ठेकेदारों का पुल फेल होने की चर्चाएं चलाई जा रही है, जबकि हकीकत में बड़े ठेकेदारों व कुछ पार्षदों की मिलीभगत से पूर्व में निर्धारित फर्मों को ही काम मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। नगर परिषद के कुछ बड़े व बदनाम ठेकेदारों ने अपने अलावा अन्य छोटे व आर्थिक रूप से कमजोर ठेकेदारों की फर्मों के नाम पर भी निविदा प्रक्रिया में भाग लिया है। बताया जा रहा है कि छोटे ठेकेदारों को 10 से 20 प्रतिशत मार्जिन देकर बड़े ठेकेदार काम हथियाने में जुटे हुए हैं। ऐसे ठेकेदारों को पार्षदों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।