कोहरे की तैयारियों पर एयरलाइंस ने उठाए सवाल

– यात्रियों को हो सकती है परेशानी
नई दिल्ली। दिल्ली हवाईअड्डे से उड़ान भरने वालों को इस साल तकलीफ उठानी पड़ सकती है। एयरपोर्ट ऑपरेटर ने संकेत दिए हैं कि क्षमता की कमी की वजह से वह उड़ान के निर्धारित समय में बदलाव नहीं कर सकती है। एयरलाइंस को डर है कि इसकी वजह से उन्हें उड़ानें रद्द करनी पड़ेगी। एयरलाइंस को भेजी गई सूचना में दिल्ली हवाईअड्डे की ऑपरेटर दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने कहा है कि उसने इस साल कोहरे के लिए अलग से समय सारिणी नहीं बनाई है, जिससे अन्य उड़ानों के लिए क्षमता बढ़ सके।
बहरहाल एयरपोर्ट ऑपरेटर ने उम्मीद जताई है कि उसके दोनों रनवे पर कम दृश्यता की स्थिति में भी उड़ान भरी जा सकेगी और एयरलाइंस के पास पर्याप्?त मात्रा में प्रशिक्षित क्रू हैं, जो ऐसी स्थिति में बगैर किसी व्यवधान के उड़ान संचालित कर सकते हैं। डायल ने कहा है, ‘पिछले साल केवल एक बार ऐसा हुआ था जब एक घंटे के लिए दृश्यता सीएटी 3 बी से कम थी। इस तरह के व्यवधान से नेटवर्क को प्रभावित किए बगैर आसानी से निपटा जा सकता है, क्योंकि इसके लिए अभी 2 महीने का पर्याप्त समय है।Ó सीएटी 3बी दृश्यता की ऐसी स्थिति है, जब रनवे पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम रह जाती है। इसकी वजह से एयरलाइंस कंपनियां चिंतित हो गई हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अगर समय सारिणी में बदलाव नहींं किया जाता है तो उन्हें उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं। उनको इस बात का डर है कि अन्य हवाईअड्डे भी कोहरे से प्रभावित होंगे और उसका असर दिल्ली की उड़ान पर भी पड़ेगा। एक एयरलाइन के अधिकारी ने कहा, ‘बागडोगरा, चंडीगढ़, गुवाहाटी, लखनऊ, श्रीनगर जैसे हवाईअड्डों पर कम दृश्यता में उड़ान भरने की सुविधाएं नहीं हैं। इनमें से कुछ हवाईअड्डों पर सुबह और शाम को भी उड़ान भरने की सुविधा नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए दिल्ली हवाईअड्डे को भी अपने कार्यक्रम में बदलाव करने की जरूरत है।Ó
अधिकारी ने कहा कि औसतन एक एयरलाइंस को 45 उड़ानों की समय सारिणी बदलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘अगर हमें समय सारिणी बदलने के मुताबिक समय नहीं दिया जाता है तो तमाम उड़ाने निरस्त करनी पड़ेगी, जिससे किराया बढऩे के साथ यात्रियों की असुविधा बढ़ेगी।Ó भारत में एयरलाइंस सामान्यतया ज्यादा कोहरे वाले दिनों में अलग समय सारिणी जारी करती हैं, जब दृश्यता बहुत खराब हो जाती है। यह जाड़े की सामान्य समय सारिणी से अलग होता है और उड़ान में देरी की वजह से समय सारिणी बदलनी पड़ती है। इससे उत्तर और पूर्वोत्तर भारत की उड़ानें खासी प्रभावित होती हैं। इस साल ऐसी स्थिति 1 दिसंबर से शुरू होने की संभावना है।
दिल्ली हवाईअड्डे के एक अधिकारी ने कहा, ‘अलग समय सारिणी होने से दो संसाधन फंसते हैं जिसमें सिर्फ एक उड़ान के लिए स्लॉट अवरुद्ध होता है। अगर इसे खत्म कर दिया जाता है तो हम सभी एयरलाइंस को उनकी जरूरतों के मुताबिक बेहतर स्लॉट दे सकते हैं। एयरलाइंस को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए कि सिर्फ ऐसे एयरक्राफ्ट और क्रू की तैनाती हो, जो कम दृश्यता की स्थिति में सुबह के वक्त उड़ान भरने में सक्षम हों।Ó हवाई यातायात बढऩे के साथ भारत के बड़े हवाईअड्डों पर स्लॉट की उपलब्धता मुश्किल हुई है। उड्डयन सलाहकार फर्म सीएपीए का अनुमान है कि 40 बड़े हवाईअड्डों को अगले कुछ साल में अपनी क्षमता का विस्तार करना होगा।