खुल गया भीषण गर्मी और सूखे में बाजरे के बचे रहने का रहस्य

नयी दिल्ली। वैज्ञानिकों ने बाजरे के जीन के समूह (जीनोम) का पता लगाया है और इस बात की खोज की है कि उच्च तापमान में तथा सूखा पडऩे पर बाजरे की फसल कैसे बची रहती है। इस शोध से वैश्विक जलवायु परिवर्तन और अनाज संकट के परिदृश्य में अन्य अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। शोध दल में भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि तापमान बढऩे और दुनिया के कई हिस्सों में लू चलने जैसी जलवायु परिवर्तन की घटनाओं के कारण मुख्य फसलों के उत्पादन में गिरावट आएगी। 30 शोध संस्थानों के 65 वैज्ञानिकों की वैश्विक टीम ने बाजरे के जीनोम के अनुक्रम का पता लगाया और खेती करने की अहम रणनीतियों का खुलासा किया।
विश्लेषण में सूखी भूमि पर उगने वाले बाजरे के 42 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक तापमान पर बचे रहने और सूखे की मार को झेलने की क्षमता के बारे में बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली। जर्नल नेचर बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित इस शोध से अन्य अहम खाद्य फसलों में जलवायु अनुकूल तरीकों को विकसित करने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं ने सूखे और गर्मी को सहने की क्षमता से संबंधित मॉलीकुलर (आणविक) मार्कर जैसी नई आनुवांशिक चीजों की पहचान की। बाजरा पोषक तत्वों से भरपूर अनाज है जिसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, जिंक, फोलेट आदि पाए जाते हैं।