गड़बड़ी की तो रिटायरमेंट के बाद भी खैर नहीं

– रिटायर तहसीलदार रामेश्वर जोशी, गिरदावर शीशपाल सिंह व पटवारी सोहनलाल सिंगाठिया को माना दोषी
– राजस्व मंडल ने तीन अधिकारी-कर्मचारियों की पांच वर्ष तक दस प्रतिशत पेंशन रोक कर दिया संदेश
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर तहसील से सेवानिवृत्त हुए तहसीलदार रामेश्वरलाल जोशी, गिरदावर शीशपाल सिंह और पटवारी सोहनलाल सिंगाठिया की पेेंशन का दस फीसदी भाग पांच साल तक रोक दी गई है। गलत इंतकाल के आरोप साबित होने पर राजस्व मण्डल अजमेर ने इन तीनों रिटायर अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन तहसीलदार रामेश्वर जोशी पर आरोप साबित हुआ है कि उन्होंने चक 1 ए छोटी के मुरब्बा नम्बर 23/30 1.55 हैक्टेयर खातेदारी तथा मुरब्बा नम्बर 53/38 0.203 हैक्टेयर गैर खातेदारी जमीन का इंतकाल 16 अप्रेल 2010 को नियम विरुद्ध कर दिया। तहसीलदार ने वसीयत के आधार पर गैरखातेदारी दर्ज करने के आदेश जारी करने से पूर्व असल वसीयत को परीक्षित नहीं किया और न ही गवाह के बयान लिये।
जांच मेंं पाया गया कि तहसीलदार ने राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 39 का उल्लंघन किया है। तहसीलदार ने जानबूझ कर अपने निजी स्वार्थांे की पूर्ति हेतु उक्त इंतकाल दज करने के आदेश दिये। इसके अलावा तत्कालीन भू-अभिलेख निरीक्षक शीशपाल सिंह ने विक्रय पत्र के आधार पर 0.033 हिस्सा का कौशल्यादेवी पत्नी श्यामसुंदर व राधादेवी पत्नी घनश्यामदास का नामांतरण संख्या 242 खोलने के लिए पेश किया, जिस पर पटवारी ने 20 अक्टूबर 2010 को मिलान किया। पटवारी ने मिलान करते समय विक्रय पत्र को नजरअंदाज कर दिया।
4 एमएल के तत्कालीन पटवारी सोहनलाल सिंगाठिया ने 28 जून 2008 से कार्य करते हुए 16 अप्रेल 2010 को चक 1 ए छोटी के मुरब्बा नम्बर 29/30 तादादी 1.55 हैक्टेयर खातेदारी तथा मुरब्बा नम्बर 58/30 तादादी 0.203 हैक्टेयर गैरखातेदारी का इंतकाल बरखादास चेला मोहनदास साकिन देह भरकर पेश किया, जिसे 17 अप्रेल 2010 को गिरदावर हल्का द्वारा मिलान किया गया। 20 अप्रेल 2010 को सरपंच ग्राम पंचायत 4 एमएल ने इसे तस्दीक किया।
इसके बाद बाबा बरखादास द्वारा 30 नवम्बर 2009 को वसीयत के आधार पर नामांतरण उसके नाम दर्ज करने हेतु दिये गये प्रार्थना पत्र पर पटवारी से तहसीलदार श्रीगंगानगर ने रिपोर्ट मांगी, तो पटवारी ने 7 अप्रेल 2010 को रिपोर्ट मेें यह अंकित नहीं किया कि कौनसा रकबा रिसीवरशुदा है। नगरपरिषद की रिपोर्ट के अनुसार बाबा निर्माण कुटिया जो कि पदमपुर रोड पर जो कि शमशान भूमि के उत्तर पर लगती है, वह वार्ड नं. 22 को लगती है। यह एरिया नगरपरिषद सीमा में आता है।
पटवारी ने नामांतरण 16 अक्टूबर 2010 को ग्राम पंचायत से तस्दीक करवा लिया, जबकि उक्त रकबा नगर परिषद सीमा में होने के कारण ग्राम पंचायत को नामांतरण स्वीकृत करने का अधिकार ही नहीं था। पटवारी ने तहसीलदार के समक्ष सही तथ्यों को प्रस्तुत नहीं कर राजकार्य के प्रति गम्भीर लापरवाही व उदासीनता बरती। अब राजस्व मण्डल अजमेर ने इन तीनों अधिकारियों की पेंशन का 10 प्रतिशत हिस्सा 5 वर्ष तक रोकने के आदेश दिये हैं।