गर्भावस्था में स्किन को प्रभावित करते हैं ये समस्याएं

गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर में हॉर्मोनल में काफी बदलाव होता है, जिससे कुछ के चेहरे पर काफी निखार आ जाता है।
त्वचा की देखभाल
गर्भावस्था के दौरान स्त्री के शरीर में हॉर्मोनल में काफी बदलाव होता है, जिससे कुछ के चेहरे पर काफी निखार आ जाता है। लेकिन अमूमन स्त्रियों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है, जिसके कारण उन्हें त्वचा संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्ट्रेच माक्र्स, खुजली, मुंहासे, पिग्मेंटेशन और प्रसव के बाद त्वचा का ढीला पड़ जाना जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं। ऐसे में त्वचा की देखभाल कैसे की जाए, आइए जानते हैं।
स्ट्रेच माक्र्स
भ्रूण के विकास के साथ पेट की त्वचा में खिंचाव होता है, जिससे त्वचा की सतह के नीचे इलास्टिक फाइबर टूट जाते हैं। स्ट्रेच माक्र्स पडऩा इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा कितनी मुलायम है। कम समय में अधिक भार बढ़ेगा तो स्ट्रेच माक्र्स ज्य़ादा पड़ेंगे। ये छठे या सातवें महीने में अधिक पड़ते हैं। ऐसा कोई उपाय नहीं है, जिससे स्ट्रेच माक्र्स हमेशा के लिए हट जाएं। मॉयस्चराइजर या विटमिन ई युक्त क्रीम लगाकर इन्हें कम किया जा सकता है, क्योंकि इससे त्वचा में नमी बनी रहती है।
मुंहासे
इस दौरान मुंहासे अधिकतर मुंह के आसपास और ठोड़ी पर पड़ते हैं। कई स्त्रियों के पूरे चेहरे पर फैल जाते हैं। अगर इनका ठीक से उपचार न कराया जाए तो यह प्रसव के बाद भी रहते हैं। कई बार ये निशान छोड़ जाते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह लिए घर पर उपचार न करें। एंटीबॉयोटिक दवाइयों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
खुजली
गर्भावस्था में पेट बढऩे के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होता है। स्किन ज्य़ादा फैलती है तो इससे खुजली की समस्या होती है। इस दौरान पूरे शरीर पर भी खुजली होती है। ऐसे में बेहतर होगा कि कैलामाइन लोशन या हेवी क्रीमयुक्त मायस्चरॉइजर लगाएं। अगर अधिक खुजली महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएं। यह गर्भावस्था में लीवर की किसी गड़बड़ी के कारण हो सकती है, जिसे कोलेस्टैटिस कहते हैं। इसके कारण समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ सकता है।
मेलास्मो
यह गर्भावस्था के दौरान त्वचा की सबसे गंभीर समस्या है, जिसे ‘प्रेग्नेंसी मॉस्क, भी कहा जाता है। इसमें चेहरे पर जगह-जगह पिग्मेंटेशन होता है और त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से संपर्क, अनुवांशिक कारण, एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रॉन का बढ़ा हुआ स्तर इसके प्रमुख कारण हैं।