गाजर मूली का अचार

सर्दियों के लिए खास गाजर मूली का अचार आपको भोजन को एक अलग और अनोखा स्वाद देता है। आप चाहे तो परांठे और पूरी को सिर्फ इस अचार के साथ भी खा सकते हैं, इसके साथ में सब्जी या दाल की भी जरूरत महसूस नही होगी।
सामग्री:
मूली – 500 ग्राम (छिली हुई)
गाजर – 250 ग्राम (छिली हुई)
अदरक – 50 ग्राम (छिली हुई)
हरी मिर्च – 50 ग्राम
नमक – 2 छोटी चम्मच
सरसों का तेल – 1/2 कप
लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटी चम्मच
हल्दी पाडर – 1 छोटी चम्मच
नमक – 2 छोटी चम्मच
काली मिर्च – 1/2 छोटी चम्मच (दरदरी कुटी हुई)
अजवायन – 1/2 छोटी चम्मच
सरसों पाउडर – 6 छोटी चम्मच (दरदरी कुटी हुई)
हींग – 2 पिंच
सिरका – 2 टेबल स्पून
विधि: मूली, गाजर, अदरक को अच्छे से धोकर पानी सूखने तक अच्छे से सुखा लीजिए। हरी मिर्च के डंठल हटाकर इसे अच्छे से धोकर पानी सूखने तक सुखाकर ले लीजिए।
मूली को 2-2 इंच के टुकड़ों में काट लीजिए और इन टुकडों को लम्बाई में पतले काट लीजिए। गाजर को भी इसी तरह से काटकर तैयार कर लीजिए और प्याले में निकाल लीजिए। अदरक को लम्बाई में पतला पतला काटकर और छोटा-छोटा 2 या 3 भाग करते हुए काट लीजिए और प्याले में निकाल लीजिए। हरी मिर्च को लम्बाई में दो भाग करते हुए काट लीजिए और इसे भी प्याले में निकाल लीजिए।
इन सब में 2 छोटे चम्मच नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर दीजिए। सभी चीजों के अच्छे से मिक्स हो जाने पर इन्हें कंटेनर में भर दीजिए और कंटेनर को बंद कर के 24 घंटे के लिए रख दीजिए। 10-12 घंटे के बाद कंटेनर को एक बार अच्छे से हिला दीजिए ताकि कंटेनर में रखी सामग्री अच्छे से मिक्स हो जाए।
24 घंटे बाद कंटेनर के अंदर मूली गाजर का जो जूस नीचे जमा हो गया है उसे अलग करेंगे इसके लिए किसी प्याले के ऊपर छलनी रखकर इस पर कंटेनर में रखी मूली गाजर डाल दीजिए ऐसा करने से सारा जूस नीचे प्याले में निकल जाएगा। 10 मिनिट के लिए मूली गाजर को छलनी में ही रखे रहने दीजिए ताकि सारा जूस इसमें से निकल कर प्याले में आ जाए।
10 मिनिट बाद मूली, गाजर, अदरक, मिर्च को किसी ट्रे पर डालकर अच्छे से फैला दीजिए और धूप में रख दीजिए ताकि बचा हुआ जूस भी सूख जाए। अगर धूप नहीं है तो आप इसे 1 घंटे के लिए पंखे की हवा के नीचे रखकर सुखा लीजिए।
मूली गाजर सूखकर तैयार हैं, मूली-गाजर को प्याले में निकाल लीजिए। इसमें 2 छोटे चम्मच नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, काली मिर्च, अजवायन और दरदरा कुटा सरसों पाउडर डाल दीजिए,
पैन में सरसों का तेल डालकर इतना अच्छे से गरम कर लीजिए कि तेल में से धुआं उठता दिखाई दे। तेल गरम होने के बंद गैस बंद कर दीजिए और तेल को थोड़ा ठंडा होने दीजिए। तेल के हल्का ठंडा होने पर इसमें हींग डालकर मिक्स कर दीजिए और इस तेल को अचार के ऊपर डालकर अच्छे से मिला लीजिए। सारे मसाले अच्छे से मिल जाने के बाद इसमें 2 टेबल स्पून सिरका डालकर मिला दीजिए।
मूली गाजर का स्वादिष्ट अचार बनकर तैयार है। इस अचार का सेवन अभी भी किया जा सकता हैं, पर अचार का असली स्वाद 3 दिन के बाद ही मिलेगा, जब मूली-गाजर-अदरक और हरी मिर्च मसाले को अच्छे से सोख लेंगे। अचार को किसी भी कन्टेनर में भरकर रख दीजिए और 2 से 3 दिन तक सूखे साफ चम्मच से अचार को ऊपर नीचे करते रहिए। यह अचार पूरे 3 से 4 महीनों तक रखकर खाया जा सकता है। जब भी आपको खाने के साथ अचार का मन हो तो कन्टेनर से अचार निकालिए और मज़े से खाइए।

जच्चा के लिए रेसिपीज
‘जच्चा स्वस्थ तो बच्चा भी स्वस्थÓ ऐसा माना जाता है इसलिए भारतीय परिवारों में बच्चे के जन्म के बाद नई मां यानी कि न्यू मदर की सेहत को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रकार की स्पेशल रेसिपीज़ बनाई जाती है। इनमें मुख्य रूप से हरीरा, सोंठ के लड्डू, आटे का हलवा इत्यादि शामिल हैं। जच्चा के लिए विशेष पंजीरी को हम कैसे भूल सकते हैं। ये सभी रेसिपीज़ पौष्टिक तो होती ही है, साथ में स्वादिष्ट भी।
जच्चा के लिए विशेष पंजीरी
यह खास पंजीरी मेवों, जीरा पाउडर, कमरकस आदि से बनाई जाती है। इस पंजीरी में कमरकस का उपयोग किया जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत होता है। यह कमर को कसती है यानी कि कमर की मांसपेशियों को मजबूत करके उसे वापस शेप में लाने में मदद करती है। कमरकस (पलाश और टेशू के पेड़ों से निकाला हुआ काले लाल रंग का गंध रहित गोंद है।
हरीरा
मेवों, हल्दी, घी से तैयार होने वाला हरीरा जच्चा के लिए काफी फायदेमंद होता है। हरीरा में विशेषतौर पर हल्दी का उपयोग किया जाता है जोकि नई मां को प्रसव चोट को जल्दी से सही करके इसकी पीड़ा से राहत दिलाती है। इसमें उपयोग होने वाला जीरा मां के दूध के उत्पादन में मदद करता है। कुछ लोग तो जच्चा की डिलीवरी के बाद उन्हें जीरे का पानी भी नियमित रूप से देते हैं।
सोंठ के लड्डू
सोंठ अत्यंत गरम तासीर की होती है। इससे बने लड्डू शरीर को गरमाहट देते हैं। साथ ही सोंठ लड्डू जच्चा को बदनदर्द से निजात दिलाने में काफी कारगार है। इन लड्डूओं को गुड़ के साथ बनाया जाता है जिससे मां के शरीर को ताकत भी मिलती है। ये पारंपरिक लड्डू विशेषत: जच्चा को सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने के लिए दिए जाते हैं।
मेवे के लड्डू
मेवे के लड्डू भी नई मां में ऊर्जा और स्फूर्ति भरने के लिए खिलाए जाते हैं। डिलीवरी के बाद जच्चा काफी कमजोर होती हैं। ?से में उसे सभी प्रकार के पोषक तत्व जैसे कि विटामिन्स, मिनरल्स इत्यादि की आवश्यकता होती है जोकि ये लड्डू प्रदान करते हैं।
खसखस का हलवा
बहुत ही गरम तासीर का होने के कारण खसखस से हलवा बनाकर नई मां को खासतौर पर खिलाया जाता है। यह हलवा जच्चा को ताकत देता है और नई मां के दूध में बढ़ोतरी करता है।
हल्दी का दूध
हल्दी का दूध जोकि टर्मरिक लाटे के नाम से मशहूर है जच्चा के लिए बेहद लाभप्रद होता है। हल्दी में ऐसे गुण होते हैं जो प्रसव की चोट को शीघ्रता से सही करते हैं और पीड़ा से जल्दी निजात दिलाने में जच्चा की मदद करते हैं। अत्यधिक गरम तासीर के होने के कारण हल्दी से बनने वाला दूध जच्चा के शरीर को गरमाहट प्रदान करता है। साथ ही हल्दी बेहद स्वास्थ्यवर्धक होती है इसलिए न्यू मदर को हेल्दी बनाने के लिए हल्दी का दूध दिया जाता है।
इन सभी रेसिपीज़ को भारतीय परिवार नई मां के लिए खासतौर पर बनाते हैं ताकि जच्चा फिर से हृ्ष्ट -पुष्ट बन सके और नवजात शिशु का बेहतर तरीके से ध्यान रख पाए। इनके अतिरिक्त कई अन्य प्रकार के स्वास्थ्यवर्धक आहार मां को बनाकर दिये जाते है, जैसे कि हलीम के लड्डू, नारियल का पाग, गोंद के लड्डू, मखाने का पाग, गोंद का पाग, आदि। हमने खासतौर पर अपने दर्शकों के लिए अपने यूट्यूब चैनल पर जच्चा के लिए विभिन्न प्रकार की रेसिपीज़ की प्ले लिस्ट उपलब्ध है-