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ग्लूकोमा से बचना है तो हर महीने कराएं आंखों की जांच

 बीते कुछ सालों से ग्लूकोमा (काला मोतिया/ सम्बलबाई) के बढ़ते रोगी विश्व भर में चिंता का विषय बन चुके हैं ग्लूकोमा के अनेक रोगी अक्सर दृष्टि के चले जाने तक इस रोग से बेखबर होते हैं। इस बिमारी में दृष्टि को दिमाग तक ले जाने वाली नस की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। जिस तरह हमारा ब्लड प्रेशर होता है, उसी प्रकार से आंखों का भी प्रेशर होता है। इसे इंट्राओक्युलर प्रेशर कहा जाता है। जब इंट्राओक्युलर प्रेशर आंखों की नस की सहन की क्षमता से अधिक हो जाता है, तो उसके तंतुओं को नुकसान होने लगता है, इसे ग्लूकोमा कहा जाता है।
रोग का स्वरूप
ग्लूकोमा में आंख के पर्दे की मुख्य नस (ऑप्टिक नर्व) धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती है। इस कारण हमारी दृष्टि कम होते-होते पूरी तरह चली जाती है। नस के क्षतिग्रस्त भाग का उपचार संभव नहींहोता, केवल जो हिस्सा स्वस्थ है,उसे ग्लूकोमा नियंत्रण की मेडिकल विधियों द्वारा बचाया जा सकता है।
पहचानें इस रोग को लक्षणों के अभाव में ग्लूकोमा की रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है। इस रोग को समय रहते पहचानना और उपचार द्वारा उसे नियंत्रण में रखना आवश्यक है।
आंख में द्रव का दबाव (आई.ओ.पी.) यह एक उपयोगी व साधारण जांच है।
दृष्टि की परिधि नापना (फील्ड चार्र्टिंग):ग्लूकोमा की पहचान व नियंत्रण के लिए यह एक उपयोगी जांच है, परन्तु यह जांच मुख्य नस की 30 प्रतिशत तक क्षति होने के बाद ही ग्लूकोमा का पता लगा सकती है।
रेटिनल नर्व फाइबर लेयर एनालिसिस(आर.एन.एफ.एल.): ग्लूकोमा के रोग में आंख की मुख्य नस में किसी तरह की क्षति होने से पहले इस जांच के जरिये पता लगाया जा सकता है।
इस आधुनिक जांच के जरिये हम सीधे आंख की नस व पर्दे की विस्तृत जानकारी पा सकते हैं ग्लूकोमा होने के एक से छह वर्ष पहले ही इस रोग के होने का पता लगा सकते हैं।
जो लोग पहले से ही ग्लूकोमा से पीडि़त हैं, उनके लिए भी यह जांच अति आवश्यक है। आर.एन.एफ.एल. जांच एक अत्यंत सहज, आरामदायक व जल्द हो जाने वाली जांच है। जो लोग ग्लूकोमा से पीडि़त हैं, उन्हें प्रतिवर्ष इस जांच को कराना चाहिए।
क्या है इलाज
ग्लूकोमा के इलाज में आंखों में बढ़े हुए द्रव के दबाव को कम करने के लिए नेत्र विशेषज्ञ के परामर्श से दवाओं का प्रयोग किया जाता है। अगर दवाएं कारगर नहीं हो रही हों, तब आंखों में बढ़े हुए दबाव को कम करने के लिए ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है।
ग्लूकोमा के लक्षण
– जब किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा होता है तो आंखों में तरल पदार्थ का दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है।
– आंखों के नंबर में जल्दी-जल्दी उतार-चढ़ाव आता है।
– आंखें अक्सर लाल रहती हैं।
– रोशनी का धुंधला दिखाई देना और आंखों में तेज दर्द होना।
– धुंधलापन और रात में दिखना बंद हो जाना।
– बिना बात के मितली या उलटी होना।
– सिरदर्द और हल्के चक्कर आना।
– डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों की वजह से भी ग्लूकोमा हो सकता है।
इन लक्षणों में से अगर 2 लक्षण भी किसी व्यक्ति को अपने आप में महसूस होते हैं तो उसे तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
ग्लूकोमा से बचाव
ग्लूकोमा का पता लगाने के लिए नियमित आई चेकअप, रेटिना इवेल्यूएशन और विजुअल फील्ड टेस्टिंग कराते रहना चाहिए। प्रारंभिक स्थिति में ग्लूकोमा की पहचान कर इसे आई ड्रॉप्स और स्थिति बढ़ जाने पर लेंसर और सर्जरी से ठीक किया जा सकता है।
ग्लूकोमा के मरीजों को सर्जरी के बाद अपनी आंखों को धूल-मिट्टी से बचाना चाहिए। खासकर आंखों को मलना या रगडऩा नहीं चाहिए। आंखों पर किसी तरह का प्रेशर नहीं पडऩा चाहिए। इसके अलावा, मरीज अपने डेली रूटीन का सारा काम-काज बिना किसी प्रॉब्लम के कर सकता है।
ग्लूकोमा से बचने के लिए सभी जरूरी सावधानियां बरतें। जैसे कि आंखों में कोई भी ड्रॉप डालने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लें। दवाई को ठंडी और शुष्क स्थान पर रखें। एक बार में एक ही ड्रॉप डालें और दो दवाइयों के बीच में कम से कम आधा घंटे का अंतर रखें। आई स्पेशलिस्ट से लगातार मिलते रहने व समय से दवाइयां लेते रहने से आप ग्लूकोमा को समय रहते नियंत्रित कर एक सामान्य जीवन निर्वाह कर सकते हैं।
कई बार आंख में चोट लगने, एडवांस्ड कैटरेक्ट (बढ़ा हुआ मोतियाबिंद), डायबिटीज, आई इनफ्लेमेशन और कुछ मामलों में स्टेरॉयड्स से भी ग्लूकोमा हो सकता है। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को जिनका कोई ग्लूकोमा का कोई पारिवारिक इतिहास रह चुका हो, को इसकी शिकायत होने की ज्यादा संभावना रहती है।
ग्लूकोमा को शुरुआत में ही पहचानने का प्रयास करें। इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन नियमित जांच कराते रहने से प्रारंभिक स्थिति में ही इसकी पुष्टि की जा सकती है। इसके कुछ विशेष लक्षण भी होते हैं, जैसे आंखों में दर्द, भारीपन, सिर दर्द, लाइट देखने में दिक्कत महसूस होना, लगातार नंबर बदलना और नजर धुंधली होना आदि होने पर भी आपको तुरंत जांच करानी चाहिए।