जब उड़ते विमान में चीन ने उड़ा लिए थे भारतीय दस्तावेज

नई दिल्ली। अफवाहें यूं तो हमेशा ही दिक्कतें पैदा करती हैं, मगर 60 के दशक में एक अफवाह ने तो दो देशों के बीच युद्ध जैसा तनाव पैदा कर दिया था! तब लंदन से चीन की राजधानी पीकिंग (अब बीजिंग) के बीच उड़ते विमान में चीनी अधिकारियों द्वारा भारतीय अधिकारियों से महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लेने की खबर फैल गई। इससे दोनों देशों के बीच तनाव बहुत बढ़ गया।
अंतत: ये खबर अफवाह निकली, तब जाकर दोनों देश शांत हुए। किस्सा 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध से कुछ समय पहले का है। तब दोनों ही देशों के बीच अक्साई चिन, लद्दाख और मैकमोहन रेखा को लेकर भौगोलिक विवाद चरम पर था। चीन अक्साई चिन को अपना मानता था और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर भी अपना दावा जताता था, वहीं मैकमोहन रेखा को भी वह मान्यता नहीं दे रहा था। भारत इसके उलट पूरे लद्दाख को अपना मानते हुए अक्साई चिन के अधिकांश हिस्से को भारत का हिस्सा मानता था। मैकमोहन रेखा को भी भारत ने चीनभारत के बीच भौगोलिक सीमा मान रखा था। उसी दौरान चीन के तत्कालीन प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई भारत आए और दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बात हुई। मगर बात कुछ बनी नहीं। दोनों देश अपने दावे पर अड़े रहे।
लाई के लौटने के बाद भारत ने अपने दो विशिष्ट अधिकारियों का दल लंदन भेजा ताकि ब्रिटिश लाइब्रेरी से वे महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए जा सकें जो अक्साई चिन, लद्दाख और मैकमोहन रेखा पर भारत का दावा सही साबित कर सकें। भारतीय दल ने ब्रिटेन की कई लाइब्रेरियों की खाक छानी, नक्शे देखे, किताबें ढूंढ़ी, फोटो जुटाए, महत्वपूर्ण पदों पर रहे लोगों से बात की। इस तरह उन्होंने कड़ी मेहनत से महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए और भारत के लिए ‘मजबूत केस स्टडी तैयार की।
भारतीय अधिकारी सारे दस्तावेज लेकर लंदन से चीन की राजधानी पीकिंग जाने के लिए विमान में बैठे। ये एक लंबी दूरी की उड़ान थी और इसमें कई घंटे लगना थे। इस पूरी कवायद से देशवासी अंजान थे और राजनयिकों में भी बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी थी। तभी खबर आई कि चीन की एक गुप्त टीम ने उड़ते विमान में ही भारतीय अधिकारियों से महत्वपूर्ण दस्तावेज छीन लिए हैं और कुछ बेहद गोपनीय दस्तावेज नष्ट कर दिए हैं। भारत में ये खबर आग की तेजी से फैली और चीन के खिलाफ गुस्से का माहौल बन गया। चीन पर आरोप लगे तो वहां भी तनाव का माहौल बन गया। कूटनीतिक रूप से स्थिति बिगडऩे लगी। तभी खुलासा हुआ कि ये खबर झूठी है और किसी ने अफवाह फैला दी थी। तब जाकर दोनों देशों के लोग शांत हुए। हालांकि बाद में चीन ने दस्तावेजों की दलील ठुकरा दी और 21 अक्टूबर 1962 को भारत पर हमला कर दिया।