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जिंसों में ऑप्शन कारोबार को सेबी की मंजूरी

– शुरुआत में एक एक्सचेंज केवल एक ही जिंस में ऑप्शन शुरू कर सकेगा
मुम्बई। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आखिर वह परिपत्र जारी कर दिया है, जिसमें जिंस एक्सचेंजों को जिंसों में ऑप्शन कारोबार शुरू करने की मंजूरी दे दी गई है।
शुरुआत में एक एक्सचेंज केवल एक ही जिंस में ऑप्शन शुरू कर सकता है। किसी जिंस में ऑप्शन के लिए पोजिशन सीमा उस जिंस के वायदा अनुबंधों से दोगुनी होगी। हालांकि जिंस ऑप्शन का निपटान जटिल होगा क्योंकि वे निपटान के समय वायदा अनुबंध में तब्दील हो जाएंगे और वायदा पर लागू सभी नियम ऑप्शन पर भी लागू होंगे।
यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि ऑप्शन धारकों को डिलिवरी देने और लेने की सुविधा दी जा सके, जो वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत संभव नहीं है। इच्टिी में ऑप्शन का निपटान नकदी में होता है, इसलिए उनका निपटान आसान होता है।
सेबी ने उन जिंसों के लिए मानदंड तय किए हैं, जिन्हें ऑप्शन की मंजूरी दी जा सकती है। वह जिंस कारोबारी मात्रा के लिहाज से शीर्ष पांच जिंसों में शामिल होनी चाहिए। इसके अलावा पिछले 12 महीनों के दौरान उन जिंसों की दैनिक औसत कारोबारी मात्रा कृषि एवं प्रसंस्कृत जिंसों के लिए 200 करोड़ रुपये और गैर-कृषि जिंसों के लिए 1,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। एक्सचेंज अब भी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि ऑप्शन के लिए वे किस जिंस को चुनें क्योंकि वे केवल एक जिंस को चुन सकते हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने कहा, ‘इस उत्पाद को पहली बार मंजूरी दी जा रही है, इसलिए यह सुनिश्चित करना व्यावहारिक है कि वह उत्पाद सफल हो।Ó
एक्सचेंज जिंस को चुनेंगे, उसकी मंजूूरी उन्हें सेबी से लेनी होगी। हालांकि एक्सचेंजों को कुछ राहत मिली है क्योंकि नए परिपत्र में सेबी की सलाहकार समिति के सुझावों को अपनाया गया है। अब तक ऑप्शन के लिए एनसीडीईएक्स सोयाबीन को और एमसीएक्स सोने को तरजीद दे रहा था। लेकिन अब वे आज के परिपत्र पर विचार-विमर्श कर रहे हैं और कुछ दिनों में इस बात का फैसला लेंगे कि वे किस जिंस को चुनेंगे।
एनसीडीईएक्स ने एक बयान में कहा, ‘ऑप्शन की शुरुआत से बाजार भागीदारी में बढ़ोतरी होगी और ये वर्तमान वायदा के सहायक की भूमिका अदा करेंगे। इनसे वायदा बाजार ज्यादा मजबूत और सक्षम बनेगा। वायदा और ऑप्शन का मेल बाजार भागीदारों को वायदा के कीमत निर्धारण और ऑप्शन के आसान जोखिम प्रबंधन का फायदा दे सकता है।Ó जहां तक जिंस ऑप्शन के निपटान का सवाल है, वह काफी जटिल है। इसकी वजह यह है कि वे निपटान के समय वायदा अनुबंध में तब्दील हो जाएंगे।
किसी जिसं में लॉन्ग कॉल पोजिशन उस जिंस के वायदा अनुबंध की लॉन्ग पोजिशन में तब्दील हो जाएगी। पुट ऑप्शन उस जिंस के वायदा अनुबंध की शॉर्ट पोजिशन में बदल जाएगी। शॉर्ट कॉल पोजिशन उस जिंस के वायदा अनुबंध की शॉट पोजिशन में तब्दील हो जाएगी और शॉर्ट पुट पोजिशन उस जिंस के वायदा अनुबंध की लॉन्ग पोजिशन में बदल जाएगी। परिपत्र में कहा गया है कि अभी सेबी ने यूरोप जैसे ऑप्शन को मंजूरी दी है, जिसका मतलब है कि उन्हें निपटाने की निश्चित अवधि होगी। हालांकि सूत्रों ने बताया कि सेबी की सलाहकार समिति इस बात पर विचार-विमर्श कर रही है कि किसानों के लिए उपयुक्त साप्ताहिक या अल्पकालिक ऑप्शन को मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं। लेकिन यह फैसला बाद में किया जाएगा। एनसीडीईएक्स ने उन किसानों के लिए ऐसे ऑप्शन का प्रस्ताव रखा था, जो जल्द ही अपनी फसल की कटाई करने जा रहे हैं। परिपत्र में यह भी बताया गया है कि ऑप्शन के लिए मार्जिन कैसे संग्रहित किया जाए। ऑप्शन पोजिशन के लिए मार्क टू मार्केट लाभ और हानि का निपटान नकदी में नहीं होगा।