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जिला अस्पताल के 55 डॉक्टर घर पर भी मरीज से नहीं मांग सकते फीस

– सरकार इन्हें देती है हर साल करोड़ों रुपए का नॉन प्रेक्टिस भत्ता
– मगर हालात इसके विपरीत, हर किसी की जेब ढीली करा लेते हैं डॉक्टर
श्रीगंगानगर। जिला अस्पताल के करीब 55 डॉक्टर अगर घर पर मरीज को देखें तो उनसे फीस नहीं ले सकते। अगर ये डॉक्टर घर पर मरीज देखने के एवज में फीस मांगें तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसका कारण इन डॉक्टरों को राज्य सरकार से भारी-भरकम नॉन प्रेक्टिस भत्ता (एनपीए) मिलना लेकिन अफसोसनाक स्थिति है कि ऐसे कौनसे डॉक्टर हैं, जिन्हें एनपीए मिल रहा है, इस बारे में आम जनता को कोई जानकारी नहीं है।
डॉक्टर सरकार से मोटा एनपीए लेकर जेब मेंं डाल लेते हैं और साथ में मरीज की जेब ढीली करने से भी नहीं चूकते। जिला अस्पताल में कहीं भी ऐसे डॉक्टरों की सूची चस्पा नहीं की गई है, जिससे आम लोगों को फीस नहीं लिए जाने के प्रावधान के बारे में जानकारी हो सके। जिला अस्पताल के डॉक्टरों को हर साल करोड़ों रुपयों का भुगतान एनपीए के रूप में किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार जिला अस्पताल में 65 डॉक्टर हैं, इनमें से 55 को नॉन प्रेक्टिस भत्ता मिल रहा है।
यह भत्ता तभी मिलता है, जब कोई डॉक्टर यह घोषणा पत्र प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के समक्ष प्रस्तुत करे कि वह वह पे्रक्टिस नहीं करेगा और इसके बदले में उसे नॉन प्रेक्टिस भत्ता (एनपीए) दिया जाए।
इस घोषणा पत्र पर डॉक्टरों को एनपीए देना शुरू कर दिया जाता है और फिर एक साल बीतने पर हर महीने उनसे घोषणा पत्र लिया जाता है लेकिन इसके बावजूद ज्यादातर डॉक्टर न केवल अपने-अपने घर में प्रेक्टिस कर रहे हैं बल्कि मरीजों से दो सौ रुपए तक फीस भी वसूल रहे हैं।
मोटी रकम मिलती है एनपीए के रूप में : सूत्रों के अनुसार डॉक्टरों को नॉन प्रेक्टिस भत्ता (एनपीए) के रूप में मोटी रकम मिलती है। एक डॉक्टर को जितनी कुल तनख्वाह मिलती है, उसका 25 प्रतिशत हिस्सा एनपीए के रूप में मिलता है। यानी एनपीए का भुगतान लेने वाले डॉक्टर की तनख्वाह सवाई हो जाती है। उदाहरण के रूप में, जिला अस्पताल की पीएमओ सरदाना को एक लाख 90 हजार रुपए मासिक वेतन मिलता है।
इसमें से 40-50 हजार रुपए की कटौतियां हो जाती हैं। उन्हें करीबन डेढ़ लाख रुपए वेतन मिल जाता है, इसके 25 फीसदी हिस्से के रूप में उन्हें 36-37 हजार रुपए एनपीए मिल जाता है। इसी प्रकार सबसे जूनियर डॉक्टर को कम से कम 60 हजार रुपए तनख्वाह मिलती है। उसे अगर कट-कटा कर 50 हजार रुपए वेतन मिलता भी मान लिया जाए तो एनपीए के रूप में उसकी जेब में साढ़े बारह हजार रुपए और आ जाते हैं।
दुखद स्थिति-जनता को पता ही नहीं
इस मामले में दुखद स्थिति यह है कि किस-किस डॉक्टरों को एनपीए मिलता है, इस बारे में जनता को पता ही नहीं है। जन जागरुकता के अभाव में डॉक्टर सरकार से एनपीए के रूप में पैसा ले रहे हैं और जनता की भी जेब काट रहे हैं। इससे सरकार को नुकसान हो रहा है। एनपीए लेने वाले डॉक्टरों की सूची जिला अस्पताल में सार्वजनिक तौर पर क्यों नहीं लगाई गई है, इस बारे में पूछे जाने पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस बारे में कोई आदेश ही नहीं है। केवल जिला अस्पताल नहीं, जिले के सभी गांव-कस्बों के डॉक्टर एनपीए उठाने के साथ मरीजों से भी फीस वसूल रहे हैं।
इनका कहना है
एनपीए लेने वाले डॉक्टरों की सूची सार्वजनिक रूप में अस्पताल में लगाए जाने का कोई आदेश नहीं है। हम तो अक्सर विभागीय मीटिंग में जाते हैं, वहां डायरेक्टर तक मौजूद होते हैं लेकिन आज तक कभी किसी ने यह सूची सार्वजनिक तौर पर लगाने के लिए नहीं कहा। अगर कोई आदेश होता तो हम जरूर लगा देते। एनपीए लेने के बावजूद मरीज से फीस लेने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में प्रावधान के बारे में अभी मैं जानकारी नहीं दे सकता क्योंकि मैं मीटिंग में जयपुर आया हुआ हूं।
-डॉ. प्रेम बजाज, उप नियंत्रक, जिला अस्पताल, श्रीगंगानगर।