संसार में अगर कदम-कदम पर दुख हैं तो फिर इस संसार से पार पाने का रास्ता क्या होगा। ज्ञानियों ने सुझाया है कि जो रास्ता भीतर आने का है वही बाहर जाने का भी है। ध्यान करो और अपनी प्रसन्नता की तलाश करो। मैंने सुना है कि दुनिया बनाने के बाद ईश्वर बहुत अकेलापन महसूस ..." />
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ज्ञानियों ने बताए हैं अकेलेपन को दूर करने के उपाय

संसार में अगर कदम-कदम पर दुख हैं तो फिर इस संसार से पार पाने का रास्ता क्या होगा। ज्ञानियों ने सुझाया है कि जो रास्ता भीतर आने का है वही बाहर जाने का भी है। ध्यान करो और अपनी प्रसन्नता की तलाश करो।
मैंने सुना है कि दुनिया बनाने के बाद ईश्वर बहुत अकेलापन महसूस कर रहे थे और उनके जीवन में कोई रोमांच नहीं था। सिर्फ बैठे रहने से ईश्वर भी उकता गए। तो उन्होंने विचार किया कि कुछ करना चाहिए और उन्होंने पहला काम यह किया कि आदम की रचना की।
ईश्वर अपनी ही रचनात्मकता से प्रसन्न हो गए। उन्होंने कुछ दिन तक आदम पर नजर रखी ताकि पता लगे कि उनकी रचना कैसी है। एक दिन उन्होंने आदम से पूछा, तुम कैसे हो मेरे बेटे?
आदम ने कहा, मैं सबकुछ नीरस और खुद को अकेला पा रहा हूं। मैं चाहता हूं कि मेरी जिंदगी में कुछ रोमांच हो। अगर मेरा कोई साथी हो तो बहुत अच्छा रहेगा।
ईश्वर ने कुछ क्षण सोचा और फिर कहा, ‘तथास्तु!Ó ऐसा ही हो। जल्दी ही तुम्हें एक रोमांचक साथी मिल जाएगा।
ईश्वर ने हव्वा की रचना की। आदम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मगर यह खुशी भी चंद दिनों ही रही और फिर आदम को बोरियत महसूस होने लगी। आदम खुद को अकेला पाने लगा। उसने ईश्वर से शिकायत की और अपनी स्थिति बयां की। ईश्वर ने कहा, मेरे पुत्र, तुमने मुझसे जो मांगा मैंने वह दिया, अब आगे तुम ही जानो। समझदारी से काम लो।
तभी से आदम समझदारी से काम करने के बारे में सोच रहा है और मुश्किल परिस्थितियों से निकलने के बारे में सोच रहा है। जितना ज्यादा वह चीजों को सुलझाने की कोशिश करता है चीजें उतना ज्यादा उलझ जाती हैं। वह हव्वा के साथ भी मुश्किल महसूस करने लगा जो कि वह अकेला होने पर भी कर रहा था।
प्राचीन समय में आदम से लेकर आज के लिओनार्डो डि कैप्रियो तक सभी के सामने यही प्रश्न रहा है कि वह अकेले रहें या साथ जीवन बिताएं। दरअसल अमीर और गरीब दोनों ही तरह के लोगों के सामने यह प्रश्न रहता है कि वे किस तरह का जीवन जिएं।
जो गरीब होते हैं उनके जीवन में संघर्ष ज्यादा रहता है और वे पैसा कमाने के लिए अपने परिवार से दूर जाते हैं। जो अमीर होते हैं वे अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में इतना फंस जाते हैं कि परिवार के साथ बिताने के लिए उनके पास समय ही नहीं रहता है।
यही कारण है कि हर व्यक्ति इस दुनिया में किसी न किसी तरह के दुख का सामना करता है। नानक दुखिया सब संसार। गुरुनानक साहब ने पूरे संसार को ही दुखमय पाया था। गौतम बुद्ध ने भी ऐसा ही अनुभव किया। हर कोई जो देख सकता है वह जान सकता है कि हमने अपने लिए जो दुनिया बनाई है उसमें कदम-कदम पर दुख हैं।
तब रास्ता क्या है? ज्ञानियों ने सुझाया है कि जो रास्ता भीतर आने का है वही बाहर जाने का भी है। ध्यान करो और अपनी प्रसन्नता की तलाश करो। ओशो कहते हैं, ‘पहले अकेले हो जाओ। अपने एकांत का आनंद लेना सीखो। खुद से प्रेम करो। पहले खुद में इतने मस्त हो जाओ कि अगर कोई तुम्हारे जीवन में नहीं आता है तो भी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम अपने आप में पूर्ण हो और आनंद के स्रोत हो।
अगर कोई तुम्हारे दरवाजे पर दस्तक नहीं देता तो कोई बात नहीं। तुम्हें किसी का इंतजार नहीं है। तुम किसी की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हो। तुम मजे में हो। अगर कोई आ जाता है तो अच्छा है लेकिन अगर कोई नहीं आता है तो वह भी अच्छा है।
पहले इस स्थिति को हासिल करो फिर संबंधों में जाओ। तब तुम एक भिखारी नहीं राजा के तौर पर संबंधों को जिओगे। जो व्यक्ति अपने एकांत में आनंद तलाश लेता है वह उस व्यक्ति को ही अपनी तरफ आकर्षित करता है जो एकांत को ठीक से जीना जानता हो।
एक जैसे लोग ही संगत बनाते हैं। तब आनंद बढ़ता नहीं बल्कि गुणित हो जाता है। यह उत्सव का मौका बन जाता है। वे एक दूसरे की प्रसन्नाता चुराते नहीं हैं बल्कि एकदूसरे के साथ बांटते हैं। तब बस आनंद ही होता है।Ó

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