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टैटू मत बनवाना, नहीं तो बीमारियों से लड़ नहीं पाएगी बॉडी

बर्लिन। एक स्थायी टैटू बनवाने के बाद हो सकता है कि आपका शरीर बीमारियों से आपकी रक्षा नहीं कर सके। दरअसल, एक अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि टैटू बनवाने से लिम्फ नोड्स बढ़ सकता है, जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा। गौरतलब है कि इम्यून सिस्टम के मजबूत होने पर शरीर की बीमारियों से लडऩे की क्षमता बढ़ जाती है। वहीं, यदि इम्यून सिस्टम कमजोर हो, तो व्यक्ति जल्दी बीमार पड़ जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि टैटू की स्याही में मौजूद विषाक्त अशुद्धियां नैनोपार्टिकल्स के रूप में शरीर के अंदर चली जाती हैं और यह लिम्फ नोड्स को प्रभावित कर सकती हैं। त्वचा पर लगाए जाने वाले रंग के मिश्रण में संभावित अशुद्धियों के बारे में काफी कम जानकारी ही है। अधिकांश टैटू बनाने वाली स्याही में ऑर्गेनिक पिगमेंट्स के साथ ही निकल, क्रोमियम, मैंगनीज या कोबाल्ट जैसे प्रिजर्वेटिव्स भी होते हैं। कार्बन ब्लैक के अलावा, टैटू स्याही में इस्तेमाल होने वाला दूसरा सबसे आम इंग्रेडिएंट टाइटेनियम डाइऑक्साइड (ञ्जद्बह्र2) है। यह एक सफेद रंग का पिग्मेंट है, जिसे आमतौर पर रंगों के साथ मिलाकर कोई नया रंग बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। टीआईओडब्ल्यू आमतौर पर फूड एडिटिव्स, सनस्क्रीन और पेंट में प्रयोग किया जाता है। व्हाइट टैटू बनवाने के बाद देर से स्वस्थ होना, त्वचा का बढऩा और उसमें खुजली होना जुड़ा हुआ है। अध्ययन जर्नल साइंटिफिक रिपोट्र्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।