दलित केंद्र जाकर तिरंगा स्वीकारेंगे राहुल

नई दिल्ली। कांग्रेस उपाध्यश्र राहुल गांधी गुजरात की सियासी जंग फतह करने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हैं. गुजरात नवसृजन यात्रा के चारों दौर की यात्रा को पूरा करने के बाद एक बार फिर शुक्रवार को सियासी रण में उतरने जा रहे हैं। दो दिवसीय दौरे के तहत राहुल गांधी इस बार दलित शक्ति केंद्र का दौरा करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे. साथ ही राहुल भारत को छुआ-छूत जैसी कुप्रथाओं से मुक्त करने के लिए भी शपथ लेंगे।
बता दें कि इसी दलित शक्ति केंद्र पर विजय रुपाणी को राष्ट्रीय ध्वज पेश किया गया था, लेकिन उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया। दलित शक्ति केंद्र द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक ये भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज, है जो 125 फुट चौड़ा और 83.3 फुट ऊंचा है. एक समय इसे गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को सौंपा जाना था और उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर ने जिस तरह से छुआ-छूत प्रथाओं को खत्म करने के लिए कदम उठाए थे उसी तरह के प्रयास करने के लिए कहा गया था. इस पेशकश पर गुजरात के मुख्यमंत्री की ओर से गांधीनगर कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने कहा कि उनके पास राष्ट्रीय ध्वज रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. इसलिए मुख्यमंत्री इस ध्वज को नहीं ले सकते हैं. शक्ति केंद्र ने आगे कहा है कि राहुल गांधी शुक्रवार को गुजरात के दलित शक्ति केंद्र पर आएंगे।
राहुल इस केंद्र से भारत के नागरिकों की ओर से पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार करेंगे और देश को छुआ-छूत से मुक्त कराने के लिए वचन देंगे. कहा गया है कि एक राजनेता के तौर पर राहुल गांधी का ये एक ऐतिहासिक कदम है और ये उन लोगों के खिलाफ लड़ाई है जो एंटी-नेशनलिज्म को बढ़ावा और राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करते हैं. मालूम हो कि गुजरात में 7 फीसदी दलित मतदाता हैं. राज्य की 182 सीटों में से 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. गुजरात में दलित मतदाताओं पर बीजेपी की मजबूत पकड़ मानी जाती है। 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी इन 13 सीटों में से 10 सीटें जीतने में सफल रही है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3 सीटें आई थी. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के दलित मतदाताओं को साधने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. गुजरात में दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का समर्थन हासिल करने के बाद राहुल गांधी अब दलित शक्ति केंद्र का दौरा कर रहे हैं. इस यात्रा के बहाने राहुल गांधी की गुजरात में बीजेपी के दलित वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश है।