दो से तीन लाख में जम्मू-कश्मीर से बनते थे फर्जी हथियार लाइसेंस

– लाइसेंस के बाद हथियार भी उपलब्ध करवाता था गिरोह
– गंगानगर में बैठे-बैठे ही बन गया असले का लाइसेंस
श्रीगंगानगर। आतंकवाद निरोधक दल (एटीएस) की गिरफ्त में आया गिरोह दो से तीन लाख रुपए में जम्मू-कश्मीर से हथियारों का फर्जी लाइसेंस बनवा कर देता था। लाइसेंस देने के बाद लाखों रुपए में ही मनचाहा हथियार उपलब्ध करवाया जाता था। श्रीगंगानगर के दो व्यापारियों ने अबोहर के एक व्यक्ति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर से हथियार का लाइसेंस बनवाया था। एटीएस की पूछताछ में आरोपियों ने उपरोक्त खुलासा किया है। एटीएस के एसपी विकास कुमार ने बताया कि गिरोह के सम्पर्क में आने के बाद श्रीगंगानगर के सुमित व नरेन्द्र कुमार ने फर्जी हथियार लाइसेंस बनवाया था।
दोनों व्यापारियों ने अबोहर निवासी विशाल के जरिए लाइसेंस बनवाया था। इस काम के लिए दोनों व्यापारियों ने विशाल अबोहर को दो से तीन लाख रुपए दिए थे। विशाल ने ही फर्जी लाइसेंस बनवाने के बाद दोनों को लाखों रुपए में हथियार उपलब्ध करवाया। हथियार के लिए कितने रुपए लिए गये। इस बारे में पूछताछ की जा रही है। एसपी विकास कुमार ने बताया कि श्रीगंगानगर का नरेन्द्र कुमार कपड़ा व्यापारी है, जबकि सुमित कपड़े का ही डिस्ट्रीब्यूटर है। इनके साथ ही एटीएस ने फर्जी लाइसेंस बनवाने पर राजसमंद के राजेश कोठारी व डूंगरपुर के हेमेन्द्र कलाल को काबू किया था। एसपी ने बताया कि चारों आरोपी 14 अक्टूबर तक रिमांड पर चल रह हैं। इनसे पूछताछ की जा रही है। नरेन्द्र कुमार व सुमित के कब्जा से फर्जी लाइसेंस व हथियार बरामद हो चुका है। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि हथियार लाइसेंस बनवाने के लिए नरेन्द्र कुमार व सुमित कुमार ने गंगानगर में बैठे-बैठे ही लाइसेंस बनवा लिया।
अबोहर निवासी विशाल ने रुपए लेने के बाद श्रीगंगानगर के दोनों व्यापारियों को फर्जी लाइसेंस व हथियार उपलब्ध करवा दिए थे। रिमांड अवधि के दौरान जम्मू-कश्मीर में गिरोह के लोग कहां-कहां रूके और वहां किन-किन लोगों से मुलाकात हुई, इसकी जांच के लिए एटीएस की टीम आगे जायेगी। गौरतलब है कि एटीएस ने जम्मू-कश्मीर से बने फर्जी हथियार लाइसेंस के मामले का खुलासा करते हुए अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस गिरफ्तारी में वह लोग भी शामिल हैं, जो गिरोह को लाखों रुपए का भुगतान करके लाइसेंस बनवाने में सफल हुए।