धंधा मर्दाना ताकत का

– कानून को ताक पर रखकर सरेआम चल रहा है
श्रीगंगानगर। सेक्स समेत 54 बीमारियों के इलाज का दावा करते हुए किसी भी तरह के विज्ञापन देकर प्रचार करना कानूनी अपराध है। इसके बावजूद जिला मुख्यालय तथा जिले के विभिन्न स्थानों पर मर्दाना ताकत बेचने का धंधा सरेआम चल रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर सेक्स पॉवर, लंबाई और ब्रेस्ट तथा लिंग आदि बढ़ाने का भ्रामक प्रचार चल रहा है। सेक्स पावर बढ़ाने का दावा कर कुकुरमुत्तों की तरह उगे नीम हकीमों के फर्जी क्लीनिकों में लोगों को ठगा जा रहा है। विभिन्न कंपनियां सरेआम विज्ञापन के जरिए लोगों को सैक्स पॉवर बढ़ाने के नाम पर लूट रही हैं।
इलाके में कहीं भी चले जाएं, रास्ते भर सैक्स पॉवर बढ़ाने का दावा करने वाले नीम हकीमों के विज्ञापनों से दीवारें अटी मिलेंगी। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास इस तरह के नीम हकीमों के स्थाई अड्डे बन गए हैं। सार्वजनिक शौचालयों और मूत्रालयों मेंं बाहर से आने वाले नीम हकीमों के पर्चे चिपके रहते हैं। वे अखबारों में विज्ञापन देकर भी लोगों को उल्लू बनाते हैं। ताजा-ताजा जवान हुए लड़कों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इनके जाल में फंसते हैं।
जगह-जगह बैठे
हैं नीम हकीम
जिले में जगह-जगह नीम हकीमों ने अड्डा जमाया हुआ है। आयुर्वेद दवाओं के जानकार होने का दावा करने वाले तथाकथित पहाड़ी वैद्य तो लंबे समय पर जिला अस्पताल के ऐन नजदीक चिकित्सा विभाग की नाक के नीचे डेरा जमा कर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे ही ठगों ने कुछ समय पहले एक मनोरोगी युवक को सैक्स पॉवर बढ़ाने का झांसा देकर उससे दस हजार रुपए ऐंठ लिए। जब इस बात का पता युवक के परिजनों को लगा तो उन्होंने पुलिस थाने की शरण ली।
पुलिस के हस्तक्षेप से युवक को रुपए तो वापस मिल गए मगर ठगी करने वाले लोग आज भी उसी जगह पर डेरा जमाए हुए हैं। उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है।
क्या कहता है कानून
सेक्स समेत 54 अन्य बीमारियों के निश्चित इलाज का दावा करते हुए विज्ञापन को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित या प्रसारित करना औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम-1954 की धारा 3, 5, 7 एवं 9 (ए ) के तहत कानून अपराध है।
कानूनन, सेक्स क्षमता बढ़ाने, महिलाओं के गर्भधारण की गारंटी, मासिक धर्म में गड़बड़ी, मोटापे व सफेद दाग की समस्या से निजात दिलाने, डायबिटीज, अन्धता, बहरेपन, पागलपन सहित 54 बीमारियों से जुड़े किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। साथ ही सभी प्रकार के जादुई उपचार, जैसे तंत्र-मंत्र, कवच, ताबीज से जुड़े विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध है।
सजा का
प्रावधान है मगर…
औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम1954 के प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर संज्ञेय अपराध में छह माह से एक साल तक की सजा हो सकती है। इसके बावजूद तमाम कंपनियां और इस गोरखधंधे से जुड़े लोग इस प्रकार के प्रतिबंधित विज्ञापन के जरिए प्रचार कर लोगों को अपने जाल में फंसा कर लूटने में लगे हैं। किसी को मानो परवाह ही नहीं है।
इनका कहना है
अभी ऐसा कोई मामला ध्यान में नहीं आया है। अगर कोई मामला हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।
-तुलसीदास पुरोहित, सीओ (सिटी), श्रीगंगानगर।