धार्मिक चिह्नों वाले पटके बांधकर दरबार साहिब में जाने पर पाबंदी

अमृतसर। श्रीदरबार साहिब के दर्शन-दीदार करने वाले गैर-केसधारी श्रद्धालु अब अपने सिर पर धार्मिक चिह्न (पंथक चिन्ह) और पावन गुरबाणी से संबंधित शबद वाले पटके (रुमाल) बांधकर अंदर नहीं जा सकेंगे। श्री अकाल तख्त ने इनको तैयार करके बेचने वाले दुकानदारों को ऐसा करने की हिदायत जारी की है। तख्त श्री के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा है कि इनको इस्तेमाल के बाद लोग फैंक देते हैं, जिससे इन पावन चिन्हों शबदों की बेअदबी होती है।
इस पावन तीर्थ के दर्शन-दीदार को रोजाना एक लाख के करीब लोग आते हैं। इसमें सिखों के अलावा दूसरे धर्मों के लोग भी शामिल होते हैं। केसधारी सिख तो दस्तार (पगड़ी) या फिर बड़ा पटका धारण किए होते हैं जबकि गैर-केसधारियों की ओर से रूमाल आदि से सिर ढककर अंदर जाने की परंपरा है। इसके लिए एसजीपीसी की तरफ से हजारों छोटे रूमाल उपलब्ध कराए जाते हैं।
इसके अलावा संगत की आमद के मद्देनजर काफी दुकानदार रुमाल के आकार के धार्मिक चिन्ह और गुरबाणी शबद वाले पटके तैयार करके बेचते हैं। आमतौर पर देखने में आया है कि इस्तेमाल करने के बाद लोग इनको फैंक देते हैं। सिंह साहिब का कहना है कि इस्तेमाल के बाद यह फैंक दिए जाते हैं, नतीजतन इन पावन चिन्हों शबदों की बेअदबी होती है। उन्होंने तैयार करने बेचने वालों को हिदायत दी है कि वह ऐसा करें। पटके तैयार करें लेकिन बिना चिन्ह शबद वाले।