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नए नियम से बैंकों का बढ़ेगा एनपीए

नई दिल्ली। फंसे कर्जों पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संशोधित प्रारूप की वजह से करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में बदल सकता है।
अगर इन कर्जों का भुगतान 60 से 90 दिनों तक बकाया है तो नए नियमों के तहत इनके एनपीए में बदलने का जोखिम बढ़ गया है। सकल एनपीए का आंकड़ा बढऩे से बैंकों पर इनके लिए ज्यादा प्रावधान करने का दबाव बढ़ सकता है। बैंकिंग जगत में ऐसे खातों जिनका भुगतान 60 से 90 दिनों के अंदर नहीं हुआ हो, को विशेष निगरानी वाले खाते (एसएमए 2) माना जाता है। इनके एनपीए होने का खतरा अधिक रहता है, हालांकि इनमें से सब एनपीए नहीं होते हैं। बैंकरों का कहना है कि रिजर्व बैंक के नए नियमों से बैंकों को निर्दिष्ट खातों को एक समान देखना होगा। अगर कोई बैंक किसी खास खाते को एनपीए के तौर पर देखता है और दूसरे बैंक को भी उसी के अनुरूप उक्त खाते को अपने बही-खाते में एनपीए के तौर पर रखना होगा।
रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2017 तक बैंक के कुल ऋण में एसएमए 2 ऋणों की हिस्सेदारी करीब 3.5 फीसदी थी। सितंबर 2017 तक अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों का फंसा कर्ज करीब 8 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह अगली कुछ तिमाहियों में एनपीए श्रेणी में जिन ऋणों के जाने का जोखिम है, वह करीब 2.8 लाख करोड़ रुपये हो सकता है।