पंकज सोनी मर्डर मिस्ट्री : ऐसा पहला केस जिसे सुलझाने में जुटे हैं 200 पुलिस वाले

– चल रही है 28 लाख फोन कॉल्स की छानबीन, 50 संदिग्ध राडार पर, 12 एंगल जा रहे हैं खंगाले
श्रीगंगानगर। पंकज सोनी मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए पुलिस को इतना पसीना बहाना पड़ रहा है, जितना श्रीगंगानगर जिले में किसी भी आपराधिक वारदात को खोलने के लिए कभी नहीं बहाना पड़ा। यह एक ऐसा केस है जिसे सुलझाने के लिए एसपी के सुपरविजन में एडिशनल एसपी से लेकर कांस्टेबल तक 200 पुलिस वाले पिछले डेढ़ महीने से दिन-रात एक किए हुए हैं। जिले के इतिहास में किसी भी वारदात में इतने अधिक पुलिस कर्मी नहीं लगाने पड़े। जिले में पुलिस कर्मियों की कुल संख्या 2500 है, इसमेें से 200 के पास पिछले डेढ़ महीने से पंकज सोनी के हत्यारों को खोजने के अलावा कोई काम नहीं है। इनमें एएसपी, डीएसपी, सीआई, एसआई, एएसआई, हैड कांस्टेबल और कांस्टेबल सभी शामिल हैं।
छह दिसम्बर को हुई 27 वर्षीय पंकज की हत्या की घटना सस्पेंस थ्रिलर फिल्म और क्राइम टीवी सीरियल की कहानी की तरह उलझी है। फिल्म में पुलिस बहुत तेजी से कातिल के गिरेबान को थाम लेती है जबकि इधर हकीकत में पुलिस की रफ्तार नजर नहीं आ रही है। लोग पंकज के मामले में पुलिस की स्पीड सीआईडी और क्राइम पेट्रोल सीरियल वाली पुलिस की तरह चाहते हैं मगर एसपी हरेन्द्र महावर कहते हैं, ‘हमें हर ऐंगल को ठोक-बजाकर देखना पड़ता है। आखिर मामले को अदालत में भी टिकाना है। हम कोई कोर-कसर नहीं छोडऩा चाहते। बहुत से केस सुलझाए हैं लेकिन यह केस चुनौती बन गया है।Ó
शुरू में यह लूट के इरादे से किए कत्ल की कहानी लग रही थी लेकिन इसका रहस्य गहराता जा रहा है। पुलिस हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। हर एंगल को खंगाला जा रहा है लेकिन अभी तक सिरा नहीं जोड़ पाई है। केस में चीजें बहुत धीमी गति से सरक रही हैं। इसका कारण भी है। पुलिसें 28 लाख फोन कॉल्स की जांच कर रही है। पुलिस वाले इस उम्मीद में सिर खपा रहे हैं कि किसी कॉल में इस्तेमाल नंबर से कुछ मदद मिल जाए।
कई ऐंगल हैं पुलिस छानबीन में
पुलिस इस मामले में करीब बारह ऐंगल पर पुलिस छानबीन कर रही है। इनमें लूट, पंकज सोनी के किसी से हुए झगड़े, किसी से उसे मिली धमकी, रंजिश, लड़की के दखल, प्रोपर्टी विवाद, सादुलशहर थाने के किसी मुकदमे में पंकज की भूमिका आदि ऐंगल हैं। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि शायद पंकज कोई ऐसी बात जान गया हो, जो उसे नहीं जाननी चाहिए थी। क्या पता ऐसी किसी बात को छुपाने के लिए ही उसे मार डाला गया हो।
हर हाल में मारना ही था मकसद
लूट की वजह से मर्डर का ऐंगल अब तक की जांच में काफी कमजोर हो चुका है। पुलिस अधीक्षक इस मामले में ज्यादा जानकारी देने से परहेज करते हैं लेकिन वह जरूर स्वीकार करते हैं कि लूट उद्देश्य व्यक्ति को हथियार दिखाने से ही पूरा हो जाता है। अगर सामने वाला भिडऩे पर आमादा हो जाए तो एक गोली, दो गोली चलने की नौबत आ सकती है। पंकज पर तो सात गोलियां दागी गईं। इससे जाहिर है कि उसे मारना ही उनका मकसद था।
अपराधी बच नहीं सकता
पंकज सीआई भूपेन्द्र सोनी का भानजा होने के कारण पुलिस काफी नैतिक दबाव में है। लोग कह रहे हैं कि पुलिस अपने ही अधिकारी के परिजन के हत्यारों को नहीं पकड़ पा रही तो दूसरों के मामलों में क्या निहाल करेगी, पुलिस ऐसी सोच से फिक्रमंद आते हैं। एसपी कहते हैं, ‘हां, हमें फिक्र है जनता में ऐसी भावना पनपने की। हम कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, बच नहीं सकता।Ó