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पल भर का मजा पछतावा जिंदगी भर

– एचआईवी पॉजिटिव लोगों को जीवन भर संक्रमण झेलने के बाद आखिरकार मिलती है दर्दनाक मौत
श्रीगंगानगर। ‘एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब है एड्स से ग्रसित होना और इसका मतलब है जीवन भर संक्रमण एवं आखिरकार दर्दनाक मृत्यु। अगर सावधान और सजग रहा जाए। जीवनसाथी के प्रति वफादारी इस खौफनाक बीमारी से बचा सकती है। पल भर के मजे के लिए अपने को मौत के मुंह में डालना कहां की समझदारी है?Ó यह कहना है डॉ. इन्द्रपाल पूनिया का। वे कहते हैं कि श्रीगंगानगर जिले में इंजेक्शन और ब्लड चढ़ाने से होने वाले संक्रमण के कारण एचआईवी पॉजिटिव होने के मामले नाम मात्र हैं। अस्सी फीसदी लोग असुरक्षित यौन संबंधों के कारण संक्रमित हुए हैं।
ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले मेें जन्मजात बच्चों से लेकर सत्तर साल के वृद्ध तक एड्स के शिकार हो चुके हैं। बड़ों को तो एड्स उनकी किन्हीं गलतियों से होता है मगर एड्स ग्रस्त लोगों के बच्चों को तो इसके वायरस के साथ ही जन्म लेना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार जिले में 438 पुरुष, 315 महिलाएं, दो ट्रांसजेंडर तथा 38 बच्चे इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इन सभी बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव अपने संक्रमित माता-पिता से विरासत में मिला है।
जिले में जिन एचआईवी पॉजिटिव लोगों का उपचार किया जा रहा है, उनमें 18 महीने से पांच साल आयु के 18, पांच से पन्द्रह वर्ष आयु के 21, पन्द्रह से पच्चीस वर्ष के 129, 25 से 45 वर्ष के 426 तथा 45 से 70 वर्ष की आयु के 165 लोग शामिल हैं। डॉ. पूनिया के अनुसार एचआईवी पॉजिटिव लोगों की संख्या बढऩे का मुख्य कारण है कि लोग जांच कम करवा रहे हैं। जितनी ज्यादा देरी से पॉजिटिव होने का पता चलता है, स्थितियां उतनी ही खतरनाक होती चली जाती हैं। पूनिया के मुताबिक जो लोग हमारे पास एआरटी सेंटर में पंजीकृत हैं, हम उनका उपचार कर रहे हैं। भले ही इस उपचार से वायरस खत्म नहीं होता लेकिन पीडि़त व्यक्ति की रोग प्रति रोधक क्षमता को और गिरने से बचाया जाता है और इससे उसकी उम्र बढ़ जाती है। डॉ. पूनिया का कहना है कि यदि शरीर को बार-बार बीमारियां घेर रही हों, बीमारियों का उपचार नहीं हो रहा हो। दिन के ज्यादातर समय थकान महसूस हो। शरीर पर लाल चकत्ते नजर आएं तो बिना देरी किए एचआईवी की जांच करानी चाहिए। यह जांच जिले के सभी अस्पतालों में फ्री में की जाती है।
क्या है एड्स रोग?
डॉक्टरों के अनुसार एड्स रोग एच.आई.वी. नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जांच से पता चलता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे व्यक्ति को एच.आई.वी. पॉजिटिव कहते हैं। एच.आई.वी. पॉजिटिव व्यक्ति कई वर्षों (6 से 10 वर्ष तक) तक सामान्य प्रतीत होता है और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है लेकिन दूसरों को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।
यह विषाणु मुख्यत
शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले रक्त में मौजूद टी कोशिकाओं (सेल्स) व मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करता रहता है। कुछ वर्षों बाद (6 से 10 वर्ष) यह स्थिति हो जाती है कि शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से बचाव नहीं कर पाता और तरह-तरह के संक्रमण (इन्फेक्शन) से ग्रसित होने लगता है। इस अवस्था को एड्स कहते हैं।
एड्स का खतरा किन्हें?
– एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति।
– वेश्यावृति करने वालों से यौन सम्पर्क रखने वाले व्यक्ति।
– इंजेक्शन से नशीली दवाइयां लेने वाले।
– यौन रोगों से पीडि़त व्यक्ति।
– एचआईवी से संक्रमित माता-पिता की संतान।
– बिना जांच किया रक्त ग्रहण करने वाले लोग।
ये हैं एचआईवी
संक्रमण के लक्षण
– गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों होना।
– लगातार कई-कई हफ्ते बुखार रहना।
– कई-कई हफ्ते खांसी रहना।
– अकारण वजन घटते जाना।
– मुंह में घाव हो जाना।
– त्वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले ददोरे/चकते होना।