पूर्व डीएसओ ने पूर्व डिपो होल्डर पर करवाया मुकदमा

– रसद विभाग के अफसरों पर भी दर्ज है मुकदमा
श्रीगंगानगर। पूर्व जिला रसद अधिकारी सुनील वर्मा ने अब पूर्व डीपू होल्डर महेन्द्र मेहता के खिलाफ आईटी एक्ट में कोतवाली पुलिस थाना में मुकदमा दर्ज करवाया है। मेहता ने पहले से ही कोतवाली पुलिस थाना में ही राशन का गेहूं गबन करने के आरोप में सुनील वर्मा सहित तीन जनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा रखा है। पूर्व डीएसओ वर्तमान में एपीओ हैं और उनका मुख्यालय बीकानेर है।
जानकारी के अनुसार पूर्व डीएसओ सुनील वर्मा पुत्र रामस्वरूप वर्मा निवासी 53 एल ब्लॉक ने रजिस्टर्ड डाक से कोतवाली पुलिस थाना में महेन्द्र मेहता पुत्र भगवानदास मेहता निवासी मुखर्जीनगर व अन्य के खिलाफ भादंसं की धारा 65, 66, 66 बी, 66 सी, 66 डी, 70, 72, आईटी एक्ट व 120 बी में मुकदमा दर्ज करवाया है। सुनील वर्मा ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि महेन्द्र मेहता यहां वार्ड नम्बर 12 में उचित मूल्य की दुकान चलाता था। उस वक्त जब वह डीएसओ नियुक्त थे, तो महेन्द्र मेहता के खिलाफ शिकायतें मिली थी। इन शिकायतों की जांच की गई थी। महेन्द्र मेहता ने अपने खिलाफ हुई शिकायत की जांच को प्रभावित करने के लिए साजिश रची और पे्रस कॉन्फ्रेंस के मीडिया कर्मियों को राशन वितरण के सॉफ्टवेयर से निकाला गया रिकॉर्ड सौंप दिया। महेन्द्र मेहता यह रिकार्ड हासिल करने का हकदार ही नहीं था। महेन्द्र मेहता ने अनाधिकृत रूप से सरकार की गोपनीय रिपोर्ट को हासिल करके सार्वजनिक कर दिया। पूर्व डीपू होल्डर ने विधि के रूप रिकॉर्ड हासिल करके धोखाधड़ी की है। मामले की जांच थाना प्रभारी नरेन्द्र पूनियां को सौंपी गई है।
उधर आरोपी महेन्द्र मेहता ने बताया कि उसने रिकॉर्ड के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की और न ही उसने विभाग के सॉफ्टवेयर से रिकॉर्ड हासिल किया है। विभाग के एक अधिकारी ने ही रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया था। गौरतलब है कि पूर्व डीपू होल्डर महेन्द्र मेहता ने राशन वितरण के गेहूं को काला बाजारी में बेचने के मामले में तत्कालीन डीएसओ सुनील वर्मा, प्रर्वतन अधिकारी संदीप गौड़ व डीपू होल्डर बंटी कटारिया के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाना में मुकदमा दर्ज करवा रखा है। राशन का गेहूं काला बाजारी में बेचने के मामले में अफसरों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर पार्षद भी लामबंद हो गये थे। खाद्य मंत्री के जयपुर आवास में धरना देने के बाद सुनील वर्मा को डीएसओ पद से हटा दिया गया था। उनका मुख्यालय बीकानेर कर दिया था।