प्रोपर्टी में निवेश, घाटे का घर

– डीलरों को सैर-सपाटे का भी कॉलोनाइजर को नहीं मिल रहा लाभ
श्रीगंगानगर। पिछले चार सालों से मंदे की चपेट में आया प्रोपर्टी बाजार ठहर गया है। अब इस बाजार में कॉलोनाइजरों की साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति के बावजूद तेजी दिखाई नहीं दे रही। एक साल पहले जो भूखण्ड जिस कीमत पर बेचा व खरीदा गया, आज भी उसकी कीमत उतनी ही है। प्रोपर्टी में निवेश पर बैंक ब्याज भी नहीं निकल रहा। यह घाटे का घर साबित हो रहा है।
कॉलोनाइजर बाजार में तेजी के लिए डीलरों को सैर-सपाटे और मौज-मस्ती के ऑफर दे रहे हैं। डीलर ऐसी ऑफर का आनंद भी ले रहे हैं, लेकिन उनके इस आनंद का प्रतिफल कॉलोनाइजरों को नहीं मिल रहा। जबसे प्रोपर्टी में मंदे का दौर शुरू हुआ है, तभी से कॉलोनाइजर डीलरों को अलग-अलग ग्रुपों में कभी दुबई, गोवा तो कभी कुल्लू मनाली का टूर करवा रहे हैं। कॉलोनाइजरों की मंशा ऐसे टूर के बदले अपनी कॉलोनियों में भूखण्डों की मांग व दाम बनाये रखना है, लेकिन बाजार की चाल और डीलरों की चालबाजियों के चलते कॉलोनाइजर अपने मकसद में सफल नहीं हो पा रहे।
मंदे में बिका भूखण्ड
हनुमानगढ़ मार्ग पर स्थित रिद्धि सिद्धि एनक्लेव में 8-10 माह पहले आरबी ब्लॉक में एक भूखण्ड बाजार दर से आधी कीमत 37 लाख में बिका था। मॉल के पास आरबी ब्लॉक में ही 30&60 का भूखण्ड को 37 लाख रुपये में बिका है। यह सौदा साबित करता है कि प्रोपर्टी बाजार में ठहराव आ गया है। प्रोपर्टी डीलर का कमीशन और बैंक दर से ब्याज ही नहीं निकल पाया है।