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फूड पार्क को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और पतंजलि के बीच खींचतान

हरिद्वार। पतंजलि ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित मेगा फूड पार्क परियोजना को कहीं अन्यत्र ले जाने का फैसला किया है। पतंजलि ने उत्तर प्रदेश सरकार पर असहयोग का आरोप लगाते हुए यह निर्णय लिया। योगगुरु बाबा रामदेव के निकट सहयोगी और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि परियोजना के लिए किसी और राज्य में जमीन तलाशी जाएगी। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार अंतिम मंजूरी के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करने के लिए पतंजलि को एक माह का समय और दिया गया है। 2016 उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ग्रेटर नोएडा में पतंजलि फूड पार्क के लिए जमीन देने की घोषणा की थी। 455 एकड़ बनने वाले पार्क पर करीब सात हजार करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया था। मंगलवार को आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हमारा सपना था कि राम और कृष्ण की भूमि वाले उत्तर प्रदेश में पतंजलि मेगा फूड पार्क स्थापित कर करोड़ों किसानों की खुशहाली के लिए काम किया जाएगा तो लाखों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा, लेकिन सरकारी हीलाहवाली के चलते मजबूरी में पार्क को अन्यत्र शिफ्ट करने का निर्णय लेना पड़ा है। आचार्य बालकृष्ण ने जोर देकर कहा कि इसके लिए सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश सरकार और वहां की प्रशासनिक व्यवस्था को दोषी है। पिछले माह 28 मई को जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक कार्यक्रम में भाग लेने हरिद्वार पहुंचे तो योग गुरु बाबा रामदेव कार्यक्रम बीच में छोड़कर ही लौट गए थे। हालांकि तब पतंजलि के प्रवक्ता ने इससे स्पष्ट इन्कार किया था, लेकिन पतंजलि के नए फैसले से अब बाबा के इस कदम को योगी सरकार से नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। मेगा फूड पार्क की स्थापना को लेकर मिलने वाली मंजूरी में उत्तर प्रदेश सरकार अनावश्यक विलंब कर रही है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसमें अड़ंगा लगाया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार परियोजना को लेकर उत्साहित है और सभी कार्यवाही तेजी से पूरी की जा रही हैं।