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बहुचर्चित एसीटीओ मामले में तीन व्यापारी नेता बरी

– बीस वर्ष पुराने प्रकरण में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया निर्णय
श्रीगंगानगर। वाणिज्य कर विभाग के बहुचर्चित एसीटीओ मामले में न्यायालय ने बुधवार को संदेह का लाभ देते हुए तीन व्यापारी नेताओं को बरी कर दिया। घटनाक्रम बीस वर्ष से अधिक पहले का है।
अधिवक्ता चरणदास कम्बोज ने बताया कि वर्ष 1998 में वाणिज्य कर विभाग ने 22 जनवरी को सूरतगढ़ में जांच के दौरान ट्रक पकड़ा था। इसके अगले दिन विभागीय अधिकारियों ने गंगानगर स्थित पुरानी धानमंडी में व्यापाारियों के यहां जांच कार्रवाई की। इससे नाराज व्यापारियों ने विभाग पर उन्हें तंग-परेशान करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। कुछ व्यापारी जांच करने आए विभाग के एसीटीओ पन्नालाल के पीछे लग गए। उसी दिन पन्नालाल ने कोतवाली पुलिस थाना में कृष्ण मील, तरसेम गुप्ता, अनूप धींगड़ा और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। परिवादी ने आरोप लगाया कि व्यापारियों ने विभाग के रामप्रताप सहित 4 अन्य कर्मचारियों से मारपीट की। कपड़े फाड़कर रामप्रताप का बैग छीन लिया। पुलिस सुरक्षा मेें रिक्शे पर जा रहे परिवादी (स्वयं पन्नालाल) से मारपीट कर मुंंह काला कर दिया। सरकारी जीप को उलटा कर आग लगा दी। चरणदास कम्बोज ने बताया कि न्यायालय मेें गवाही के दौरान रामप्रताप सहित एक अन्य प्रकरण में पक्षद्रोही हो गए जबकि पुलिस भी उक्त आरोपों को साबित नहीं कर पाई। इसपर बाद सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती सुषमा पारीक ने प्रकरण के आरोपित कृष्ण मील, तरसेम गुप्ता और अनूप धींगड़ा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।