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बैंकों के 10 लाख करोड़ के फंसे कर्ज से निपटने के लिए नए नियम

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को बड़े बैंकों के एनपीए को हल करने के लिए समय सीमा तय करके बैड लोन प्रस्ताव के लिए नियमों को कड़ा कर दिया. इसके तहत बैंकों को इन खातों को दिवालिया कार्यवाही के तौर मानना अनिवार्य हो जाएगा. इसके अलावा आरबीआई ने आरबीआई ने स्ष्ठक्र और स्4्र जैसी मौजूदा डेट रीस्ट्रक्चरिंग स्कीमों को भी वापस ले लिया है. बड़े खाते मुख्यत: उन बैंकों के लिए हैं जहां बैंकों ने रिज़ॉल्यूशन शुरू किया है और उन्हें पुनर्गठित मानक संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. भारतीय बैंकों का लगभग 10 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज फंसा है.