भोरमदेव अभयारण्य को जल्द मिलेगा टाइगर रिजर्व का दर्जा

रायपुर। प्रदेश के भोरमदेव अभयारण्य को जल्द टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने वाला है। इसके वर्तमान क्षेत्रफल 350 वर्ग किलोमीटर को बढ़ाकर 624 किलोमीटर करने की भी योजना बनाई गई है। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की नौवीं और दसवीं बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दे गई है। इसे नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेज दिया गया है। पर्यावरण वन मंत्रालय की अनुमति मिलते ही इसे टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा। टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित होने से अभयारण्य की सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की हो जाएगी। विशेष फंड मिलेगा। बाघों के मूवमेंट पर निगरानी के लिए कई उपकरण भी लगाए जाएंगे। रिजर्व एरिया के कुछ पॉइंट ऐसे होंगे, जहां सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से बाघों पर नजर रखी जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था तगड़ी होने से शिकारियों की आवाजाही कम हो जाएगी। इसके अलावा संसाधनों का संचालन करने और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी होगी। जिन स्थानों पर बाघों का मूवमेंट अधिक होगा, उस प्वाइंट पर रेंजर लेवल के अफसर तैनात रहेंगे। बाघों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए आधा दर्जन से अधिक डॉक्टर नियुक्त होंगे। इन्हें एंबुलेंस सहित अन्य संसाधन भी दिए जाएंगे। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पूर्व भोरमदेव अभयारण्य मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क का बफर हिस्सा था। राज्य अलग होने के बाद इसे अभयारण्य घोषित किया गया। यहां अभी 4 बाघ हैं। एक बाघिन का शिकार जहर देकर किया गया था।