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मंदिर में नहीं है देवी की मूर्ति, सदियों से हो रही है पूजा

गुजरात का अम्बा धाम। दुनिया का एकमात्र मंदिर हैं जहां मां अम्बा माता के दिव्य स्वरूप ‘अम्बा यंत्रÓ की पूजा की जाती है। यह पूजा आंखों पर पट्टी बांध कर की जाती है।
अम्बा धाम मंदिर गुजरात और राजस्थान की सीमा पर अहमदाबाद से 18 किलो मीटर और माउंट आबू से 45 किमी दूरी पर स्थित है। यहां गर्भगृह में मां की मूर्ति नहीं है बल्कि अंबा यंत्र की पूजा की जाती है।
अंबा देवी का यंत्र गुप्त रखा गया है जिसे खुले में देखना भी निषेध है। यहां तक पुजारी भी आंखों में पट्टी बांधकर पूजा करते हैं।
मां का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है जहां मां सती का हृदय गिरा था। पौराणिक मान्यता के अनुसार नंदबाबा और माता यशोदा ने यहीं मां अम्बा के यहां भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन करवाया था। भगवान राम और लक्ष्मण सीता की खोज करते हुए यहीं से गुजरे थे। यहीं मां अम्बा ने श्रीराम को रावण का वध करने के लिए दिव्य बाण दिया था।
कहते है वाल्मीकि जी ने रामायण लिखने की शुरुआत इसी तपोभूमि से की थी। अम्बा जी के इस मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है यहां यंत्र पूजा का विधान है। यही कारण है कि मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों का मन अध्यात्म और मां की शक्ति से भर उठता है।
मां अम्बा का यह मंदिर करीब 12 सौ साल पुराना है। मंदिर का जीर्णोद्धार 1975 में शुरु हुआ था जो अभी भी जारी है। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना है मंदिर का शिखर 103 फुट ऊंचा है। यहां शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुशोभित हैं।