मकर संक्रांति पर इस बार कई शुभ योग और नक्षत्रों का संयोग

– चौदह जनवरी को दक्षिणायन से उत्तरायण में जाएंगे सूर्यदेव, खत्म होगा मलमास
श्रीगंगानगर। मकर संक्रांति पर 14 जनवरी को दोपहर 1.46 बजे सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ मलमास समाप्त हो जाएगा तथा सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में जाएंगे। दान पुण्य, जप, तप के मकर संक्रांति के मौके पर इस बार कई शुभ योग एवं नक्षत्रों का संयोग बन रहा है। इनकी वजह से मकर संक्रांति पर किए गए दान, पुण्य, स्नान का महत्व कई गुणा बढ़ जाएगा और इसके प्रतिफल प्राप्त होंगे।
पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति के दिन रविवार होने से यह पर्व और खास हो गया है। साथ ही, इस मौके पर धु्रव व सर्वार्थ सिद्धि योग, रविवार, मूल नक्षत्र, सूर्य का मकर में प्रवेश, सिंह लग्न और रवि प्रदोष का दुर्लभ संयोग कई सालों के बाद बन रहा है। उन्होंने बताया कि रविवार को पूरा दिन ही पुण्य काल रहेगा। पुण्य काल में किया गया स्नान-दान अधिक प्रभावकारी होता है। पंडित सत्यपाल पाराशर ने बताया कि वैसे जनवरी में मकर संक्रांति से विवाह आदि मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने (तारा डूबा होने) के कारण जनवरी में कोई सावा नहीं रहेगा। शुक्र का उदय एक फरवरी को होगा। इसके बाद चार फरवरी को नए साल का पहला सावा होगा।
उन्होंने बताया कि चार फरवरी से आरंभ होने के बाद विवाह आदि मांगलिक कार्यों का सिलसिला 10 जुलाई तक चलेगा। चौदह जुलाई को कर्क की संक्रांति लगने के कारण सावे नहीं होंगे। इसके बाद 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी से विवाह-शादियों पर विराम लग जाएगा। हालांकि 19 नवम्बर को देव उठनी एकादशी से देव जाग जाएंगे मगर इसके बावजूद शहनाई बजना शुरू नहीं होगी क्योंकि इस दौरान तारा डूबा हुआ होगा। पंडित पाराशर ने बताया कि मकर संक्रांति पर बन रहे योग-संयोगों के अनुसार चांदी आदि धातुओं में तेजी आएगी। गेहूं, चना और जौ में तेजी का रुख रहेगा। सोलह जनवरी के आसपास वर्षा एवं बादलवाही संभव हैं। उत्तर भारत में शीत लहर चलेगी। कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में भारी हिमपात होगा। वातावरण में धुंध छाई रहेगी। 26 जनवरी को भारी बर्फबारी तथा वर्षा होने के संकेत मिल रहे हैं।
क्या है मकर संक्रांति?
पंडित पाराशर ने बताया कि सूर्य के राशि बदलने की प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। सूर्यदेव अभी धनु राशि में हंै और 14 जनवरी को धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होगी। मकर संक्रांति पर दान, पुण्य, जप, तप आदि का विशेष महत्व है।