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मां-बाप को शिशु के स्वास्थ्य के बारे में अक्सर होते हैं ये भ्रम

सभी मां-बाप अपने बच्चों को बहुत प्यार करते हैं और अगर बच्चा पहला हो, तब तो वो उसकी हर तरह से देखभाल करना चाहते हैं। ज्यादातर लोग जो पहली बार मां-बाप बनते हैं, शिशुओं के संबंध में कई तरह के भ्रम पाल लेते हैं। इन भ्रम के कारण वो शिशुओं के इशारों या उसके स्वास्थ्य को नहीं समझ पाते हैं और कई बार गलती कर देते हैं। ऐसे में हर मां-बाप को शिशुओं के बारे में प्रचलित भ्रम की हकीकत जान लेनी चाहिए।
भ्रम एक: नवजात शिशु को आजकल के मौसम में स्तनपान के अलावा पानी पिलाते रहना चाहिए। इससे उसके होंठ नहीं सूखेंगे।
हकीकत: शिशु के लिए स्तनपान एक संपूर्ण आहार है। बढ़ते शिशु के लिए जन्म से लेकर छह माह तक सभी जरूरी पोषण मां के दूध में उपलब्ध होते हैं। इसमें 85-90 प्रतिशत तक पानी ही होता है। इसलिए उसे अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं है। छह माह तक ऊपरी दूध, शहद, घुट्टी, पानी या ठोस आहार देने से बचें।
भ्रम दो: नवजात शिशु अक्सर दूध पीते ही शौच कर देते हैं। इससे वे भूखे हो जाते हैं और रोते रहते हैं। अत: हर आधे-आधे घंटे में दूध पिलाना जरूरी होता है।
हकीकत: दूध पीते ही शौच कर देना एक सामान्य बात है जिसे ‘गैस्ट्रोलिक रिफ्लैक्सÓ कहते हैं। इससे बच्चे भूखे नहीं हो जाते। बच्चे के रोने को हमेशा भूख ही न समझें। हर आधे घंटे में दूध पिलाना अनावश्यक है। इससे शिशु के बेवजह गैस बनेगी जो कि उसे परेशान करेगी। स्तनपान के लिए डेढ़ से दो घंटे का फासला सही है। इसके बाद शिशु को डकार अवश्य दिलाएं।
भ्रम तीन: शिशु को पीलिया होने पर मां को हल्दी नहीं खानी चाहिए व पीला कपड़ा नहीं पहनना चाहिए। मां को खाने-पीने में और अधिक परहेज रखने चाहिए।
हकीकत: पीलिया ज्यादातर नवजात शिशुओं में होता है। इसका मां के खानपान व पहनने से कोई ताल्लुक नहीं है। मां को तो और बेहतर खिलाना चाहिए ताकि स्तनपान के पोषण से बच्चा शीघ्र हृष्ट-पुष्ट हो, हां यदि पीलिया ज्यादा हो तो बालरोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
भ्रम चार: इस मौसम बच्चों को केला, चावल, अमरूद, दही खिलाने से सर्दी-जुकाम या न्यूमोनिया हो सकता है
हकीकत: यह बात सही नहीं है। जुकाम या न्यूमोनिया जैसी बीमारियां वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से होती हैं, न कि कुछ खाने की वजह से। दुनिया के कई हिस्सों में लोग साल भर चावल खाते हैं और स्वस्थ भी रहते हैं। इसलिए यह वहम छोड़कर अपने शिशु को बेझिझक सभी पौष्टिक आहार खिलाएं।
भ्रम पांच: बदलते मौसम में बच्चे को नहलाने से परहेज करना चाहिए, ताकि उसे सर्दी न हो जाए।
हकीकत: बच्चे को सर्दी सिर्फ संक्रमण से हो सकती है, जो कि सफाई के अभाव में अधिक होगा। नहलाने व सफाई रखने से बच्चा संक्रमण रहित व स्वस्थ रहेगा। इसलिए नहलाने से परहेज करना व्यर्थ है। बुखार के दौरान भी बच्चे को अवश्य नहलाएं, जिससे बुखार उतरने में मदद मिले।
भ्रम छह : शिशु को सर्दी से बचाने के लिए कमरा बंद करकेअंगीठी/हीटर या गर्म पानी की बोतल से गर्मी देनी चाहिए।
हकीकत: अंगीठी या फर्नेस का धुआं बच्चों के लिए बहुत हानिकारक होता है, जिससे सांस की तकलीफ हो सकती है। गर्म पानी की बोतल से शिशु की कोमल त्वचा जल सकती है। हीटर भी शिशु के ठीक सामने न रखें। हीटर के सामने एक कटोरा पानी रखें, जिसकी भाप वातावरण को नमी प्रदान करे, क्योंकि सूखी गरम हवा से शिशु को सांस लेने में तकलीफ होगी।
भ्रम सात: इस मौसम में एलर्जिक बच्चों में दमा या एलर्जी के अटैक बढ़ जाते हैं। इससे बचाने के लिए उन्हें समय से एंटीबायोटिक दवाएं दे देनी चाहिए।
हकीकत: बदलते मौसम के साथ हवा में तापमान, आद्र्रता व जीवाणुओं में फेरबदल होता है। एलर्जिक बच्चे इस फेरबदल के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते, जिससे दमा/एलर्जी के अटैक बढ़ जाते हैं, पर इनके उपचार/रोकथाम में एंटीबायोटिक दवाओं का कोई महत्व नहीं है। धूल-धुएं से परहेज व एंटी-एलर्जिक दवाओं के सही इस्तेमाल से ही इनसे बचा जा सकता है।
भ्रम आठ: बच्चे को खांसी, बुखार होने पर टीकाकरण नहीं कराना चाहिए।
हकीकत: इस दौरान टीकाकरण करने से कोई नुकसान नहीं होगा। दूसरी ओर अक्सर बीमारी की वजह से टीकाकरण न होने की स्थिति में बच्चा इन गंभीर बीमारियों के विरुद्ध सुरक्षा से वंचित रह जाएगा। इसलिए केवल गंभीर बीमारी के दौरान ही टीकाकरण से परहेज करने की जरूरत है।
भ्रम नौ: मां को खांसी-जुखाम होने पर शिशु को स्तनपान नहीं कराना चाहिए।
हकीकत: मां की संक्रमित सांस से शिशु को संक्रमण हो सकता है, परंतु दूध से नहीं। इसलिए मां अपना इलाज जरूर कराए। बच्चे को गोद में लेने से पहले साबुन से हाथ धोएं। स्वस्थ होने तक फेस मास्क द्वारा अपनी नाक व मुंह ढक लें। जिससे मां की सांस से संक्रमण शिशु तक न पहुंचे। इसके पश्चात वह निश्चिंत होकर स्तनपान करा सकती हैं।