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मुख्यमंत्री योगी के प्रमुख सचिव पर रिश्वत मांगने का आरोप

लखनऊ। योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए गुरुवार को बड़ा कदम उठाते हुए दो जिलों के डीएम और कई अफसरों को निलंबित कर दिया, लेकिन इसी दिन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल पर रिश्वत मांगने का आरोप चर्चा में आ गया। हरदोई में पेट्रोल पंप खोलने में आ रही रुकावट दूर करने के लिए उन पर 25 लाख रुपये मांगे जाने के आरोप लगे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि शिकायत मिलने के बाद राज्यपाल राम नाईक ने कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया। जबकि, भाजपा ने शिकायतकर्ता पर पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर दे दी है। गौरतलब है कि जमीन का मानक पूरा न होने से गुप्ता के पेट्रोल पंप की स्वीकृति भी निरस्त हो गई है। उधर, मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह सरकार की छवि खराब करने का प्रयास है। इस मामले की जांच होने जा रही है और जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। प्रमुख सचिव एसपी गोयल ने कई फोन और मैसेज करने के बाद भी जवाब नहीं दिया। शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लखनऊ के इंदिरानगर में रहने वाले अभिषेक गुप्ता ने ई-मेल से 18 अप्रैल को राज्यपाल को शिकायत भेजी कि हरदोई की संडीला तहसील के रैसो में एस्सार ऑयल लिमिटेड द्वारा स्वीकृत पेट्रोल पंप स्थापित किया जाना है, लेकिन पेट्रोल पंप के मुख्य मार्ग की चौड़ाई कम होने के कारण आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के लिए उनका आवेदन प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री के स्तर पर लंबित है। राज्यपाल द्वारा 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र में कहा गया कि पेट्रोल पंप के मुख्य मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने को प्रमुख सचिव एसपी गोयल उनसे 25 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यही पत्र गुरुवार को सार्वजनिक हो गया। सरकार की ओर से बताया गया कि अभिषेक गुप्ता अपनी जमीन पर पेट्रोल पंप लेना चाहते थे, लेकिन उसका फ्रंट मानक के अनुसार नहीं था। इस जमीन के आगे ग्राम सभा की जमीन है और मानक पूरा करने के लिए अभिषेक ने ग्राम सभा की जमीन के एक्सचेंज का प्रस्ताव रखा। अधिकारियों ने नियम का हवाला दिया कि सरकारी जमीन का एक्सचेंज सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए ही हो सकता है जबकि पेट्रोल पंप निजी व्यवसाय के दायरे में आता है। इसी आधार पर अभिषेक का प्रस्ताव मान्य नहीं हुआ। इसके बाद अभिषेक गुप्ता ने मुख्यमंत्री के विशेष सचिव को भाजपा संगठन के एक प्रमुख नेता का हवाला देते हुए फोन किया और दबाव बनाने की कोशिश की। सफलता न मिलने पर अभिषेक गुप्ता ने एसपी गोयल पर रिश्वत मांगने का गलत आरोप मढ़ दिया।