मेट्रो ट्रेन के लिए चुनना होगा तीन में से एक विकल्प : तोमर

इंदौर। मध्यप्रदेश सरकार को इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में मेट्रो ट्रेन चलाना है तो इसके लिए तीन विकल्पों में से एक को चुनना होगा। पहला विकल्प, वह केंद्र के साथ 50-50 प्रतिशत लागत भागीदारी के साथ मेट्रो प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन करे। दूसरा, सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर निजी कंपनियों से प्रोजेक्ट में पैसा निवेश करवाए। पीपीपी मॉडल में केंद्र सरकार 10 प्रतिशत अनुदान राशि देगी। तीसरा विकल्प यह कि निजी कंपनी से साझेदारी कर प्रोजेक्ट क्रियान्वित करे और शहरी विकास मंत्रालय से एकमुश्त 20 प्रतिशत राशि ले ले। यह बात केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेद्र सिंह तोमर ने पत्रकारों से कही। उन्होंने बताया कि फिलहाल छह शहरों में 500 किमी लंबा मेट्रो ट्रैक बिछाने का काम हो रहा है। केंद्र ने जो नई गाइड लाइन तय की है कि उसके हिसाब से मध्यप्रदेश को दोबारा अपने प्रोजेक्ट के लिए विकल्प चुनकर केंद्र को भेजना होंगे। नई गाइड लाइन काफी अच्छी है और इससे प्रोजेक्टों में एकरूपता आएगी। उन्होंने माना कि इंदौर और भोपाल में भविष्य को देखते हुए अभी से मेट्रो प्रोजेक्ट की प्लानिंग जरूरी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि जापानी कंपनी जायका ने इंदौर-भोपाल के मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए लोन देने से इंकार किया है तो इसमें चिंता की बात नहीं है। विश्व की दूसरी वित्तीय संस्थाओं के विकल्प मौजूद हैं।