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यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवाज क्यों नहीं उठा रहे दोनों सांसद?

– दिल्ली-सराय रोहिल्ला टे्रन में लगातार हो रही आपराधिक वारदातें
– अंधेर नगरी चौपट राजा
श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर-दिल्ली सराय रोहिल्ला टे्रन में सफर करने वाले लोग लंबे समय से असामाजिक तत्वों की बदमाशियों को झेल रहे हैं। जींद में इस टे्रन में लूटपाट की घटना तो बड़ी होने के कारण हाईलाइट हो गई लेकिन छोटी-मोटी रोजाना होने वाली वारदातें तो प्रकाश में ही नहीं आ पातीं। यह टे्रन बीकानेर से श्रीगंगानगर होते हुए वाया पंजाब-हरियाणा दिल्ली जाती है और इसी रास्ते से वापस आती है। इस टे्रन के रूट के राजस्थान में पडऩे वाले छोटे से हिस्से में ही दो सांसदों केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और निहालचंद मेघवाल का संसदीय क्षेत्र पड़ता है लेकिन अफसोस का विषय है ये दोनों ही सांसद इस टे्रन के यात्रियों के जान माल की सुरक्षा के लिए आवाज नहीं उठा रहे।
सराय रोहिल्ला टे्रन के आम डिब्बों की तो छोडि़ए, इसके लिए द्वितीय श्रेणी शयनयान और एसी कोच में बैठे यात्री भी भगवान भरोसे रहते हैं। नियमानुसार, द्वितीय श्रेणी और एसी कोच में कोई व्यक्ति बिना आरक्षण के प्रवेश नहीं कर सकता। अगर प्रवेश करता है तो उस पर जुर्माना लग सकता है। टीटीई उसे नीचे उतार सकता है लेकिन इस टे्रन में ऐसी कोई पाबंदियां नजर नहीं आतीं। लोग अपनी मर्जी से द्वितीय श्रेणी और एसी कोच में चढ़ते-उतरने रहते हैं। इनमेंं से कौन शरीफ है और कौन बदमाश, यह जांचने का यात्रियों के पास कोई जरिया नहीं होता। वह तो सुबह नींद खुलने पर पता चलता है कि किसका सूटकेस गायब है या किसका बैग उड़ा लिया गया है।
इस टे्रन में समय-समय पर सफर वाले लोगों की मानें तो टे्रन के आरक्षित कोच के टीटीई अपनी जेब भरने में मशगूल रहते हैं। पैसे लेकर ऐसे लोगों को भी आरक्षित कोच में यात्रा कराई जाती है, जिनके पास जनरल कोच का टिकट होता है। आमतौर पर टीटीई आधी रात के बाद अपनी ड्यूटी वाले कोच में नजर नहीं आते। इससे लुटेरों, उठाईगिरों को वारदाता का मौका मिलता है। लोग टे्रन की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग उठा रहे हैं। लोग चाहते हैं कि केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल तथा निहालचंद मेघवाल इस मसले को दिल्ली में उच्च स्तर पर उठा कर टे्रन में शांति एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। टे्रन में सुरक्षा पाना यात्रियों का अधिकार है और सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करना जन प्रतिनिधियों का दायित्व, जो शायद अभी तक सांसदों को याद नहीं आ रहा है।