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Movie Review: ‘ट्यूबलाइट,

फिल्म मेकर कबीर खान की फिल्म ‘ट्यूबलाइट, आज रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म में सलमान के साथ उनके भाई सोहेल खान भी है। यह कहानी दो भाइयों भरत सिंह बिष्ट(सोहेल खान) और लक्ष्मण सिंह बिष्ट (सलमान खान) की है। बचपन में ही उनके माता-पिता की डेथ हो जाती है। यह दोनों साथ-साथ बड़े होते हैं और एक-दूसरे को बहुत चाहते हैं। बड़े होने पर भरत को आर्मी की तरफ से युद्ध लडऩे के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिसकी वजह से लक्ष्मण दुखी हो जाता है। वह नहीं चाहता कि उसका भाई युद्ध लडऩे जाए। कुछ समय के बाद जब भरत घर वापस नहीं आता तो लक्ष्मण उसकी तलाश में निकल जाता है। लक्ष्मण के अंदर एक बचपना है, जिसकी वजह से उसे आस-पड़ोस के लोग ट्यूबलाइट भी कहते हैं। लक्ष्मण जब अपने भाई को खोजने निकलता है तो उसकी मुलाकात कई लोगों से होती है। फिल्म में ओम पुरी, चाइल्ड आर्टिस्ट मेटिन सहित कई लोगों की एंट्री होती है। कहानी में मोड़ तब आता है, जब इंटरवल के बाद लक्ष्मण को कई बातों का अहसास होता है और उसके भीतर एक यकीन होता है कि वह अपने भाई को वापस ले आएगा। क्या इस काम में लक्ष्मण सफल हो पाता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।
बता दें कि फिल्म का डायरैक्शन बढिय़ा है और सिनेमैटोग्राफी, लोकेशंस भी कहानी के हिसाब से अच्छे हैं। क्योंकि कबीर खान हमेशा से ही वर्जिन लोकेशन पर शूटिंग करने के लिए जाने जाते हैं। इस वजह से फिल्मांकन के दौरान कहानी काफी अच्छी लगती है। कैमरावर्क और कहानी का फ्लो भी अच्छा है। फिल्म की कहानी बहुत इमोशनल है, जो कि सलमान खान को उनके टिपिकल अंदाज से काफी अलग दिखाती है। सलमान की मसाला फिल्मों जैसी यह फिल्म नहीं है। इस वजह से हो सकता है कि एक खास तरह की ऑडियंस को ही यह पसंद आए। फिल्म में बहुत सारे इवेंट्स अलग-अलग टाइम पर होते रहते हैं, जिनके बीच सामंजस्य और फ्री फ्लो देखने को नहीं मिलता और कहानी काफी बिखरी बिखरी सी नजर आती है। फिल्म की स्क्रिप्ट और बेहतर हो सकती थी। सलमान खान ने इस फिल्म में बहुत ही उम्दा अभिनय किया है और यह उनके करियर की सर्वोत्तम फिल्मों से एक कही जा सकती है। उनके चेहरे की मासूमियत और उनकी आंखों में पानी कुछ लोगों की आंखें नम भी कर सकता है। सलमान के अलावा मंझे हुए कलाकार ओम पुरी हैं, जो अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका काम भी काफी दिलचस्प है। चाइल्ड आर्टिस्ट मेटिन ने भी बढिय़ा काम किया है। चाइना मूल की एक्ट्रेस जू जू का काम भी बेहतरीन है। मोहम्मद जीशान अयूब ने सराहनीय काम किया है। शाहरुख खान का कैमियो भी करेक्ट समय पर आता है, जो सरप्राइज़ करता है। फिल्म का म्यूजिक अच्छा है और गानों की एक खासियत है कि इनके दौरान फिल्म की स्टोरी भी आगे बढ़ती रहती है और हमें यह भी पता चलता है कि आखिरकार फिल्म में सलमान खान को लोग ‘ट्यूबलाइट, क्यों कहते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है।