विभाजन में 70 साल पहले बिछड़ा परिवार 21 किलोमीटर दूर मिला

फतेहगढ़ साहिब। भारत-पाकिस्तान विभाजन में अपनों से बिछड़ जाने का दर्द आजादी के 70 साल बाद भी हजारों परिवारों के दिलों में टीस बनकर उभरता है। हजारों लोग सगे संबंधियों से मुलाकात की उम्मीद में दुनिया को भी अलविदा कह गए और कुछ परिवार आज भी यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शायद विभाजन का दर्द जीवन के अंतिम पड़ाव में खुशी में बदल जाए। कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है और इस कहावत को फतेहगढ़ साहिब (पंजाब) के गांव खानपुर सोढियां के हरपाल सिंह सोढ़ी के परिवार ने बिलकुल सही साबित कर दिखाया। हरपाल सोढ़ी ने विभाजन में बिछड़े अपने परिवार के सदस्यों को वर्षों बाद ढूंढ निकाला। हैरानी की बात है कि 70 साल बाद खानपुर सोढियां के इस परिवार को उनके बिछड़े अपने मात्र 21 किलोमीटर दूर खन्ना में मिले। यह 21 किलोमीटर की दूरी, जो वह 70 साल में तय नहीं कर पाए, वह उन्होंने हरिद्वार के पंडितों और फेसबुक की मदद से तय कर ली। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हरपाल सोढी बताते हैं कि विभाजन से पहले उनका संयुक्त परिवार लाहौर (पाकिस्तान) में एक ही हवेली में रहता था। विभाजन में परदादा बाबा कृष्ण सिंह से उनके तीन भाई बिछड़ गए। परदादा, दादा और पिता ने खानपुर सोढियां में डेरा लगा लिया। उनके बुजुर्ग हमेशा हवेली में बिताए पलों को याद कर दुखी होते थे। हरपाल ने बुजुर्गों के दर्द को कम करने की ठानी। हरिद्वार पहुंचकर पुरोहित भवानी दास व देवकी नंदन से उनके वंश की पूरी जानकारी हासिल की। इस जानकारी और लाहौर में परदादा व उनके भाइयों के बिछडऩे की जानकारी फेसबुक पर शेयर कर दी। जब मिले तो बचपन की यादों में खो गए बुजुर्ग फेसबुक पर शेयर की जानकारी के कुछ दिनों बाद खन्ना से कुछ लोगों ने हरपाल सोढी से संपर्क किया। यह परिवार उनसे मुलाकात करने उनके घर आया। बुजुर्गों ने बचपन में हवेली में बिताए पलों की बातें शुरू कर दीं और यादों में खो गए।