विवादित रहा राजनीतिक सफर, फिर भी समर्थक करते थे ‘अम्मा की पूजा

j-jayalalitha-18चेन्नई। जयललिता के राजनीतिक करियर से कई विवाद जुड़े रहे हैं लेकिन अपने लोकलुभावन और गरीब समर्थक नीतियों की वजह से उनके समर्थक लगभग उनकी पूजा करते हैं। जयललिता ने 1982 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) से जुड़ कर राजनीति की शुरुआत की थी। इस पार्टी की नींव करिश्माई नेता एम जी रामचंद्रन में रखी थी। अभिनय की दुनिया से राजनीति में आईं जयललिता ने क डलोर में अपने पहले भाषण में महिलाओं की महानता पर बोला था और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। एक साल बाद ही जयललिता को पार्टी का प्रोपगंडा सेक्रेट्री बना दिया गया। उन्होंने पार्टी के लिए तिरुचेंदुर उप चुनाव में पार्टी के लिए जम कर प्रचार किया।  इसके बाद उन्हें पहली बार 1984 में पार्टी की ओर से राज्यसभा में भेजा गया। यह उनकी राजनीति का अहम मोड़ साबित हुआ। इसी साल स्ट्रोक की वजह से पार्टी के सबसे बड़े नेता एम जी रामचंद्रन राजनीतिक कामकाज में अक्षम हो गए। उन्हें अमेरिका के अस्पताल में भर्ती कराया गया। कहा जाता है कि इधर जयललिता ने राजीव गांधी से मुलाकात कर खुद को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर दी।