शिप बिल्डिंग में करियर

बिग क्रूज या मालवाहक शिप की बढ़ती डिमांड के कारण इस सेक्टर में यूथ का इंट्रेस्ट तजी से बढ़ रहा है.. ने जब विस्तार लिया तो ऐसे बड़े-बड़े पानी के जहाज बनकर तैयार हुए, जिनमें एक छोटा-मोटा शहर समा जाए। इन जहाजों को तैयार करने में सालों का वक्त लगता है और इसमें हजारों लोग एक साथ काम करते हैं। पानी के बड़े-बड़े जहाजों को बनाने की जो प्रक्रिया होती है, उसे शिप बिल्डिंग कहा जाता है। आज पूरी दुनिया में होने वाले आयात-निर्यात में सबसे बड़ा योगदान पानी के जहाजों का ही है। इसके बाद ही कोई और माध्यम आता है। चूंकि दुनिया का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से घिरा हुआ है, ऐसे में जहाज वैश्वीकरण के दौर में दुनिया के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।
कोर्स व योग्यता:- इस सेक्टर में एंट्री के लिए पीसीएम से 12वीं करने के बाद बीएससी इन शिप बिल्डिंग एंड रिपेयर कोर्स कर सकते हैं, जो तीन साल का है। हां, पीसीएम में कम से कम 55 प्रतिशत अंक होना जरूरी है। 10वीं एवं 12वीं में अंग्रेजी में 50 प्रतिशत अंक हासिल करना भी जरूरी है। इसमें सिर्फ बैचलर स्टूडेंट ही एडमिशन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उम्र 17 से 25 साल (एससी/एसटी को सरकारी दिशा निर्देश के अनुसार छूट प्राप्त है) के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा इसमें उन्हीं स्टूडेंट्स को आवेदन करने का मौका मिलता है जो सीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। सीईटी की परीक्षा आइएमयू, चेन्नई कंडक्ट कराता है, जो साल में एक बार होता है। इसके बाद आइएमयू रिटेन टेस्ट लेता है। इस दौरान कैंडिडेट्स की काउंसिलिंग भी की जाती है। लिखित परीक्षा में 180 ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न होते हैं जो पीसीएम/इंग्लिश/जनरल नॉलेज व रीजनिंग पर आधारित होते हैं।
संभावनाएं:- एक्सपट्र्स के मुताबिक इस कोर्स को पूरा करने के बाद शानदार मौके मिलते हैं। स्किल्ड पर्सन असिस्टेंट मैनेजर/इंटर्न/शॉप फ्लोर एग्जीक्यूटिव के रूप में नियुक्ति हो सकती है। तीन साल के एक्सपीरिएंस के बाद डिप्टी मैनेजर तक बन सकते हैं, लेकिन इसके लिए शिप प्रोडक्शन में पोस्ट ग्रेजुएशन करना जरूरी होता है। शिप बिल्डिंग या पोर्ट मैनेजमेंट में एमबीए करने के बाद आप मैनेजर बन सकते हैं। उसके बाद डीजीएम, जीएम और सीईओ की पोस्ट तक पहुंच सकते हैं।
आमदनी:- जैसे-जैसे आपकी योग्यता बढ़ेगी, तरक्की की राह आसान होगी और सेलरी में भी इजाफा होता चला जाएगा। इस सेक्टर में ग्रोथ की कोई सीमा नहीं है। एक असिस्टेंट मैनेजर की सेलरी 30 हजार से शुरू होती है और सीईओ तक पहुंचते-पहुंचते लाखों में पहुंच जाती है।