सद्भाव और भाइचारे की मिसाल बनेंगे संत गुरमीत राम रहीम

– आशंकाओं के माहौल में यह विश्वास सबको करना चाहिए कि
श्रीगंगानगर। इस महीने की 25 तारीख को लेकर इलाके में हर शख्स परेशान सा है। इस दिन पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम पर चल रहे मुकदमे का फैसला होना है।
यह फैसला डेरा प्रमुख के अनुकूल होगा अथवा प्रतिकूल, इस बारे में कोई भविष्यवाणी कर पाना किसी के बस में नहीं है। इस बात का पता उसी दिन चल पाएगा मगर इस मुद्दे को लेकर जिस तरह कई दिनों से आशंकाओं का माहौल है, वह वास्तव में चिंताजनक है। लोग बाजारों, गली-नुक्कड़ों, घरों, दुकानों, बस और टे्रन हर जगह इसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं।
सिरसा का डेरा सच्चा सौदा हमेशा मानवता का हितैषी और सद्भाव का पोषक रहा है। संत गुरमीत राम रहीम ने जब से गुरु गद्दी संभाली है, तब से इस डेरे का असर अत्यधिक बढ़ा है। दूर-दूर तक के लोग डेरे के फॉलोवर बने हैं। इसके साथ यह भी सच है कि डेरा प्रमुख पर आरोप भी लगते रहे हंै।
इन्हीं में से एक आरोप साध्वियों के यौन शोषण का है। जहां एक ओर डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम ऐसे तमाम आरोपों को ड्रफ माफिया की साजिश बताकर खारिज करते आए हैं, वहीं दूसरी ओर अदालतें अपनी तयशुदा प्रक्रिया के तहत अपना काम कर रही हैं। साध्वियों के बयानों और लंबी जिरह के बाद यह मामला अब फैसले की देहरी पर पहुंच गया है। अदालत ने 25 तारीख फैसले के लिए मुकर्रर की है।
फैसला डेरा प्रमुख के अनुकूल होगा अथवा प्रतिकूल, यह कोई नहीं जानता मगर इस मामले के कारण समूचे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के हनुमानगढ़-गंगानगर जिलों मेंं बेचैनी का वातावरण तो बन ही गया है। डेरा मुखी को ‘पिताजीÓ कह सम्मान देने वाले उनके फॉलोवर्स में प्रतिकूल फैसले के अंदेशे से बेचैनी है।
पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती ने बेचैन कर दिया है। आम आदमी इस आशंका से बेचैन है कि पता नहीं क्या होगा?
बेहद अनिश्चितता वाले वातावरण में अगर कोई तटस्थ है तो वह न्याय पालिका। उसे कोई अंदेशा नहीं। कोई डर नहीं। हर किसी को न्याय देने के लिए मशहूर हमारी न्याय पालिका से किसी को डर होने का सवाल ही नहींं क्योंकि न्याय पालिका किसी के साथ अन्याय नहीं करती। उसके लिए हर कोई समान है। उसके सामने कोई छोटा नहीं-कोई बड़ा नहीं।
देश का न्यायिक इतिहास गवाह है कि देश के नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा न्याय पालिका के बूते पर ही संभव हो पाई है। डेरे के फॉलोवर्स को जितना भरोसा अपने गुरु पर करते हैं, उतना ही भरोसा उन्हें न्याय पालिका पर भी करना चाहिए। संत गुरमीत राम रहीम स्वयं पहल कर इस भरोसे के संवाहक बनें तो कहना ही क्या।
अदालत का फैसला किसी के अनुकूल आता है और किसी के प्रतिकूल। मगर हर किसी के लिए विकल्प हमेशा खुले रहते हैं। अगर अदालत का फैसला किसी के प्रतिकूल होता है तो उसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक के दरवाजे खुले हैं। देश के विधान में विश्वास रखने वाले लोग जरूरत पडऩे पर हमेशा इस दरवाजे को खटखटाते आए हैं। हमारे माननीय जजों ने आधी रात को भी सुनवाई के लिए अदालत के द्वार खोलने मेें संकोच नहीं किया है।
शांति और सद्भाव की स्थापना प्रत्येक धर्मगुरु का प्रथम कार्य होता है। डेरा सच्चा सौदा ने हमेशा शांति और सद्भाव की धारा बहाई है।
गुरमीत राम रहीम भी इसी धारा में बहकर डेरे की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचे हैं। वैसे भी शांति और सद्भाव को पलीता लगाने जैसे कृत्य की उम्मीद किसी से संत से कौन करता है? संत गुरमीत राम रहीम शांति, सद्भाव और भाइचारे की मिसाल बनेंगे, यह विश्वास सबको करना चाहिए।