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सफर करते समय बस की खिड़की से हाथ बाहर होना लापरवाही नहीं

– पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
चंडीगढ़। सफर करते हुए अगर कोई व्यक्ति अपना हाथ खिड़की के बाहर रखता है तो उसे लापरवाह नहीं कहा जा सकता। भारत में अक्सर लोग आराम के लिए अपना हाथ खिलाड़ी पर रखकर चलते हैं। खिड़की पर हाथ रखकर चलने के कारण अपना हाथ गंवाने वाले की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए यह व्यवस्था दी। कोर्ट ने निर्धारित मुआवजा राशि को 60 हजार से बढ़ाकर हाईकोर्ट ने 5 लाख 86 हजार कर दिया।
मामला विकास सहगल की याचिका से जुड़ा है जो बस में सफर कर रहा था और खिड़की खोलने के लिए हाथ बाहर होने के चलते सामने से आ रहे एक ट्रक ने बिलकुल नजदीक से गुजरते हुए उसकी बाजू कुचल दी थी।
सन 2000 में हुई इस दुर्घटना के लिए बस ड्राइवर को दोषी करार देते हुए याची ने 10 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग की थी। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल जालंधर ने बस चालक, ट्रक चालक और पीडि़त तीनों को दोषी करार दिया था और 1 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा तय किया था। विकास को लापरवाह बताते हुए ट्रिब्यूनल ने 50 प्रतिशत राशि की कटौती कर मुआवजा राशि 60 हजार कर दी थी। हाईकोर्ट में विकास ने अपील दाखिल की थी, जिसका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने विकास के पक्ष में निपटारा कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि लोग अक्सर आराम के लिए अपने वाहन या बस की खिड़की पर हांथ रखते हुए सफर करते हैं और उनका हांथ बाहर की ओर होता है।
इस स्थिति में उन्हें लापरवाह नहीं कहा जा सकता। यह ड्राइवर की जिम्मेदारी होती है कि वह सुरक्षित दूरी बनाए रखे और क्लोज ड्राइविंग न करे।